🔬
🧬
🔭
🪐
🧪
← डैशबोर्ड पर वापस जाएँ
Font Size:

1. परिचय

सजीवों के शरीर में विभिन्न अंग एक साथ मिलकर कार्य करते हैं ताकि पर्यावरण में हो रहे परिवर्तनों (उद्दीपन - Stimulus) के प्रति उचित अनुक्रिया (Response) हो सके। शरीर की इस क्षमता को नियंत्रण एवं समन्वय कहते हैं। उदाहरण के लिए, जब हम गर्म बर्तन को छूते हैं तो तुरंत हाथ पीछे खींच लेते हैं; जब प्रकाश तेज होता है तो पुतली सिकुड़ जाती है। ये सभी क्रियाएँ नियंत्रण एवं समन्वय तंत्र द्वारा ही संभव होती हैं। जंतुओं में यह कार्य तंत्रिका तंत्र (Nervous System) तथा अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine System) द्वारा किया जाता है, जबकि पौधों में तंत्रिका तंत्र नहीं होता, वे केवल रासायनिक (हॉर्मोनल) नियंत्रण द्वारा समन्वय करते हैं।

तंत्रिका तंत्र तीव्र गति से कार्य करता है, परंतु इसका प्रभाव अल्पकालिक होता है। दूसरी ओर हॉर्मोन धीमी गति से कार्य करते हैं, परंतु उनका प्रभाव दीर्घकालिक होता है। तंत्रिका तंत्र में न्यूरॉन नामक कोशिकाएँ विद्युत आवेगों द्वारा संदेश संप्रेषित करती हैं, जबकि हॉर्मोन रक्त के माध्यम से लक्षित अंगों तक पहुँचते हैं। इस अध्याय में हम तंत्रिका कोशिका की संरचना, प्रतिवर्ती क्रिया, मानव मस्तिष्क के भाग, पादपों में समन्वय की गतियाँ, पादप हॉर्मोन तथा जंतुओं के अंतःस्रावी तंत्र का विस्तार से अध्ययन करेंगे।

2. जंतु तंत्रिका तंत्र एवं न्यूरॉन

तंत्रिका तंत्र संवेदी अंगों से सूचनाएँ ग्रहण करता है तथा प्रतिक्रिया के लिए पेशियों तक संदेश पहुँचाता है। तंत्रिका तंत्र की संरचनात्मक तथा क्रियात्मक इकाई तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) है, जो शरीर की सबसे लंबी कोशिका होती है। न्यूरॉन के मुख्य भाग निम्न हैं:

  1. द्रुमिका (Dendrite): कोशिका काय से निकलने वाले धागेनुमा प्रवर्ध जो संवेदनाओं (सूचनाओं) को ग्रहण करते हैं।
  2. कोशिका काय: इसमें केंद्रक तथा कोशिकाद्रव्य होता है।
  3. तंत्रिकाक्ष (Axon): यह सूचना को विद्युत आवेग के रूप में कोशिका काय से दूर ले जाता है।
  4. अंतर्ग्रथन (Synapse): दो न्यूरॉनों के बीच का खाली स्थान, जहाँ एक न्यूरॉन के तंत्रिकाक्ष का अंतिम सिरा दूसरे न्यूरॉन की द्रुमिका से मिलता है। यहाँ विद्युत आवेग को तंत्रिका-संवाही रसायनों (न्यूरोट्रांसमीटर) में बदलकर अगले न्यूरॉन तक भेजा जाता है।

प्रतिवर्ती क्रिया (Reflex Action)

किसी उद्दीपन के प्रति मस्तिष्क के हस्तक्षेप के बिना मेरुरज्जु द्वारा दी गई अचानक तथा अनैच्छिक प्रतिक्रिया को प्रतिवर्ती क्रिया कहते हैं। जैसे गर्म वस्तु छूने पर तुरंत हाथ हटा लेना। जिस मार्ग से आवेग गुजरता है उसे प्रतिवर्ती चाप (Reflex Arc) कहते हैं। इसका क्रम है - ग्राही अंग → संवेदी न्यूरॉन → मेरुरज्जु → प्रेरक न्यूरॉन → कार्यकर पेशी।

3. मानव मस्तिष्क

मस्तिष्क शरीर का मुख्य समन्वय केंद्र है, जिसके तीन मुख्य भाग होते हैं:

  1. अग्र मस्तिष्क: यह मस्तिष्क का मुख्य सोचने वाला भाग है। इसमें प्रमस्तिष्क (Cerebrum) होता है, जो स्मरण शक्ति, बुद्धिमत्ता, चेतना तथा सभी ऐच्छिक कार्यों का केंद्र है। यह भूख, प्यास, सुनने, सूंघने तथा देखने के संवेदी केंद्रों को भी नियंत्रित करता है।
  2. मध्य मस्तिष्क: यह सिर, गर्दन तथा धड़ की प्रतिवर्ती गतियों को नियंत्रित करता है तथा पुतली के आकार एवं नेत्र लेंस में परिवर्तन को नियंत्रित करता है।
  3. पश्च मस्तिष्क: इसके तीन भाग होते हैं। अनुमस्तिष्क (Cerebellum) शरीर का संतुलन एवं मुद्रा बनाए रखता है; मेडुला अनैच्छिक क्रियाओं (रक्तचाप, हृदय की धड़कन, उल्टी, लार आना) को नियंत्रित करता है; तथा पॉन्स श्वसन को नियंत्रित करने में सहायता करता है।

मस्तिष्क कपाल नामक हड्डियों के बॉक्स में बंद होता है तथा प्रमस्तिष्कमेरु द्रव (CSF) इसे झटकों से बचाता है।

4. पादपों में समन्वय

पौधों में न तो तंत्रिका तंत्र होता है और न ही पेशियाँ। पौधे उद्दीपनों के प्रति दो प्रकार की गतियाँ दर्शाते हैं:

(क) वृद्धि पर निर्भर गतियाँ (अनुवर्तन - Tropic Movements)

ये दिशात्मक गतियाँ होती हैं जो उद्दीपन की दिशा पर निर्भर करती हैं:

  1. प्रकाशानुवर्तन: प्रकाश की दिशा में वृद्धि, जैसे तने का प्रकाश की ओर मुड़ना।
  2. गुरुत्वानुवर्तन: गुरुत्वाकर्षण की दिशा में वृद्धि, जैसे जड़ों का नीचे तथा तने का ऊपर जाना।
  3. जलानुवर्तन: जल की ओर जड़ों की वृद्धि।
  4. रसायनानुवर्तन: रसायनों के प्रति वृद्धि, जैसे पराग नलिका का बीजांड की ओर विकास।

(ख) वृद्धि से मुक्त गतियाँ (अनुकुंचन - Nastic Movements)

ये दिशाहीन गतियाँ हैं, जैसे छुई-मुई के पौधे को छूने पर उसकी पत्तियों का सिकुड़ जाना। इसमें पौधे की कोशिकाएँ जल की मात्रा में परिवर्तन करके अपना आकार बदलती हैं।

5. पादप हॉर्मोन

  1. ऑक्सिन: प्ररोह के शीर्ष पर बनता है, कोशिकाओं की लंबाई में वृद्धि करता है तथा प्रकाशानुवर्तन के लिए उत्तरदायी है।
  2. जिब्बेरेलिन: तने की वृद्धि तथा बीज अंकुरण में सहायता करता है।
  3. साइटोकाइनिन: कोशिका विभाजन को प्रेरित करता है, फलों तथा बीजों में अधिक सांद्रता में पाया जाता है।
  4. एब्सिसिक अम्ल (ABA): इसे तनाव हॉर्मोन भी कहते हैं, यह वृद्धि का संदमन करता है, जैसे पत्तियों का मुरझाना तथा रंध्रों का बंद होना।

6. जंतुओं में हॉर्मोन (अंतःस्रावी तंत्र)

अंतःस्रावी ग्रंथियाँ अपना स्राव (हॉर्मोन) सीधे रक्त में स्रावित करती हैं। मुख्य ग्रंथियाँ एवं हॉर्मोन निम्न हैं:

  1. थायरॉइड: थायरॉक्सिन हॉर्मोन कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन तथा वसा के उपापचय को नियंत्रित करता है। इसके निर्माण के लिए आयोडीन आवश्यक है; कमी से घेंघा (Goitre) रोग होता है।
  2. पीयूष ग्रंथि: वृद्धि हॉर्मोन स्रावित करती है, इसे मास्टर ग्रंथि कहते हैं। कमी से बौनापन तथा अधिकता से भीमकायता होती है।
  3. अग्न्याशय: इंसुलिन हॉर्मोन रक्त में शर्करा के स्तर को नियंत्रित करता है; कमी से मधुमेह (Diabetes) होता है।
  4. अधिवृक्क: एड्रिनलीन हॉर्मोन को लड़ो या उड़ो (Fight or Flight) हॉर्मोन कहते हैं; आपातकालीन स्थितियों (डर, गुस्सा) में हृदय गति बढ़ा देता है।
  5. वृषण (नर): टेस्टोस्टेरोन नर में यौवनारंभ के लक्षणों (दाढ़ी-मूंछ, भारी आवाज) का विकास करता है।
  6. अंडाशय (मादा): एस्ट्रोजन तथा प्रोजेस्टेरोन मादा में यौवनारंभ के लक्षणों तथा मासिक धर्म को नियंत्रित करते हैं।

पुनर्भरण क्रियाविधि (Feedback Mechanism): हॉर्मोनों का स्राव उचित मात्रा में बनाए रखने के लिए शरीर पुनर्भरण क्रियाविधि का उपयोग करता है। जैसे रक्त में शर्करा बढ़ने पर इंसुलिन का स्राव बढ़ता है तथा शर्करा कम होने पर घटता है।

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: मानव मस्तिष्क के भाग एवं कार्य

भाग उपभाग मुख्य कार्य
अग्र मस्तिष्क प्रमस्तिष्क सोचना, स्मृति, ऐच्छिक क्रियाएँ
मध्य मस्तिष्क - सिर-गर्दन की प्रतिवर्ती गतियाँ
पश्च मस्तिष्क अनुमस्तिष्क संतुलन, मुद्रा
पश्च मस्तिष्क मेडुला हृदय धड़कन, रक्तचाप
पश्च मस्तिष्क पॉन्स श्वसन नियंत्रण

तालिका 2: हॉर्मोन एवं उनके कार्य

ग्रंथि हॉर्मोन कार्य
थायरॉइड थायरॉक्सिन उपापचय (घेंघा - आयोडीन)
पीयूष वृद्धि हॉर्मोन वृद्धि (बौनापन)
अग्न्याशय इंसुलिन शर्करा नियंत्रण (मधुमेह)
अधिवृक्क एड्रिनलीन आपातकाल (लड़ो-उड़ो)

माइंड मैप

graph TD A["नियंत्रण एवं समन्वय"] --> B["तंत्रिका तंत्र"] A --> C["पादपों में समन्वय"] A --> D["अंतःस्रावी तंत्र"] B --> B1["न्यूरॉन"] B --> B2["मस्तिष्क"] B --> B3["प्रतिवर्ती क्रिया"] B1 --> B1a["द्रुमिका, कोशिका काय, तंत्रिकाक्ष"] C --> C1["अनुवर्तन गतियाँ"] C --> C2["अनुकुंचन गतियाँ"] C --> C3["हॉर्मोन"] C1 --> C1a["प्रकाश, गुरुत्व, जल, रसायन"] D --> D1["थायरॉइड, पीयूष, अग्न्याशय, अधिवृक्क"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

आरेख 1: प्रतिवर्ती चाप

प्रतिवर्ती चाप (Reflex Arc) ग्राही अंग (उद्दीपन ग्रहण) कार्यकर पेशी (हाथ हटना) संवेदी न्यूरॉन मेरुरज्जु (मस्तिष्क के बिना) प्रेरक न्यूरॉन प्रतिवर्ती क्रिया की विशेषता अचानक, अनैच्छिक, मस्तिष्क के हस्तक्षेप के बिना मेरुरज्जु द्वारा उदाहरण: गर्म वस्तु छूने पर तुरंत हाथ हटाना स्वर्ण नियम प्रतिवर्ती क्रिया मेरुरज्जु द्वारा, मस्तिष्क के बिना होती है

आरेख 2: पादप हॉर्मोन एवं उनके कार्य

पादप हॉर्मोन पादप हॉर्मोन ऑक्सिन कोशिका वृद्धि, प्रकाशानुवर्तन जिब्बेरेलिन तने की वृद्धि, अंकुरण साइटोकाइनिन कोशिका विभाजन एब्सिसिक अम्ल (ABA) तनाव हॉर्मोन, वृद्धि का संदमन, रंध्र बंद छुई-मुई की गति अनुकुंचन है (दिशाहीन) Golden Rule ऑक्सिन वृद्धि बढ़ाता है, ABA वृद्धि रोकता है

सामान्य गलतियाँ

  1. प्रतिवर्ती क्रिया को मस्तिष्क द्वारा नियंत्रित बताया जाता है; वास्तव में यह मेरुरज्जु द्वारा नियंत्रित होती है।
  2. पादप हॉर्मोनों के कार्यों में भ्रम होता है; ऑक्सिन वृद्धि बढ़ाता है जबकि ABA वृद्धि रोकता है।
  3. अनुवर्तन और अनुकुंचन गतियों में अंतर नहीं समझ पाते; अनुवर्तन दिशात्मक है जबकि अनुकुंचन दिशाहीन है।
  4. पीयूष ग्रंथि को थायरॉइड के स्थान पर मास्टर ग्रंथि बता दिया जाता है; मास्टर ग्रंथि पीयूष ही है।
  5. इंसुलिन की कमी से घेंघा तथा आयोडीन की कमी से मधुमेह लिख दिया जाता है; इन्हें उल्टा न लिखें।
  6. न्यूरॉन में द्रुमिका और तंत्रिकाक्ष के कार्य उल्टे लिख दिए जाते हैं; द्रुमिका ग्रहण करती है, तंत्रिकाक्ष संप्रेषित करता है।
  7. एड्रिनलीन को धीमी गति से कार्य करने वाला हॉर्मोन बताया जाता है; एड्रिनलीन आपातकाल में तेजी से कार्य करता है।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. न्यूरॉन की संरचना के चार भाग (द्रुमिका, कोशिका काय, तंत्रिकाक्ष, अंतर्ग्रथन) के कार्य लिखें।
  2. प्रतिवर्ती चाप का क्रम (ग्राही → संवेदी न्यूरॉन → मेरुरज्जु → प्रेरक न्यूरॉन → पेशी) याद रखें।
  3. मानव मस्तिष्क के तीन भागों तथा पश्च मस्तिष्क के तीन उपभागों के कार्य रटें।
  4. पादप हॉर्मोनों (ऑक्सिन, जिब्बेरेलिन, साइटोकाइनिन, ABA) के कार्य अलग-अलग लिखने का अभ्यास करें।
  5. अंतःस्रावी ग्रंथियों की तालिका बनाकर हॉर्मोन तथा कार्य (रोगों सहित) लिखें।
  6. अनुवर्तन के चार प्रकारों (प्रकाश, गुरुत्व, जल, रसायन) के उदाहरण सहित उल्लेख करें।
  7. पुनर्भरण क्रियाविधि की व्याख्या में इंसुलिन-शर्करा का उदाहरण दें।
  8. "लड़ो या उड़ो" हॉर्मोन (एड्रिनलीन) का नाम एवं कार्य लिखें।

निष्कर्ष

नियंत्रण एवं समन्वय जीवों को पर्यावरणीय उद्दीपनों के प्रति उचित अनुक्रिया करने में सक्षम बनाता है। जंतुओं में यह तंत्रिका तंत्र तथा अंतःस्रावी तंत्र द्वारा संपन्न होता है। तंत्रिका तंत्र न्यूरॉनों द्वारा विद्युत आवेगों के माध्यम से तीव्र परंतु अल्पकालिक अनुक्रिया करता है, जबकि हॉर्मोन धीमी परंतु दीर्घकालिक प्रभाव डालते हैं। प्रतिवर्ती क्रिया मेरुरज्जु द्वारा मस्तिष्क के हस्तक्षेप के बिना संपन्न होती है। मानव मस्तिष्क के अग्र, मध्य तथा पश्च भाग विभिन्न कार्यों का नियंत्रण करते हैं। पौधों में तंत्रिका तंत्र न होते हुए भी अनुवर्तन एवं अनुकुंचन गतियों तथा हॉर्मोनों द्वारा समन्वय होता है। थायरॉक्सिन, इंसुलिन, एड्रिनलीन जैसे हॉर्मोन शरीर की विभिन्न क्रियाओं को नियंत्रित करते हैं। नियंत्रण एवं समन्वय का ज्ञान शरीर विज्ञान तथा चिकित्सा विज्ञान की आधारशिला है।