पृथ्वी पर 118 से अधिक तत्व पाए जाते हैं, जिनमें से प्रत्येक के गुणधर्म भिन्न होते हैं। यदि प्रत्येक तत्व का अलग-अलग अध्ययन किया जाए तो यह अत्यंत कठिन एवं अव्यवस्थित हो जाएगा। इसलिए वैज्ञानिकों ने समान गुणधर्मों वाले तत्वों को एक साथ समूहों में व्यवस्थित करने की आवश्यकता अनुभव की, ताकि उनका अध्ययन सरल, व्यवस्थित और सार्थक हो सके। तत्वों को उनके गुणधर्मों के आधार पर एक व्यवस्थित क्रम में सजाने की इस प्रक्रिया को तत्वों का वर्गीकरण कहते हैं। प्रारंभ में तत्वों को केवल धातु और अधातु में बाँटा गया था, परंतु यह वर्गीकरण अधूरा था क्योंकि कुछ तत्व उपधातु भी होते हैं।
वर्गीकरण के क्रम में अनेक वैज्ञानिकों ने अपना योगदान दिया। जोहान डोबेराइनर ने त्रिक का सिद्धांत प्रस्तुत किया, न्यूलैंड्स ने अष्टक का नियम दिया, फिर दमित्री मेंडेलीफ ने परमाणु द्रव्यमान के आधार पर आवर्त सारणी का निर्माण किया। अंततः हेनरी मोज़ले ने परमाणु क्रमांक को आधार बनाकर आधुनिक आवर्त सारणी प्रतिपादित की। इस अध्याय में हम इन विभिन्न वर्गीकरण प्रणालियों, उनकी उपलब्धियों एवं सीमाओं तथा आधुनिक आवर्त सारणी में समूहों और आवर्तों में दिखाई देने वाली प्रवृत्तियों (संयोजकता, परमाणु आकार, धात्विक गुण, विद्युत ऋणात्मकता) का विस्तार से अध्ययन करेंगे।
जर्मन रसायनज्ञ जोहान वोल्फगांग डोबेराइनर ने समान गुणधर्मों वाले तत्वों को तीन-तीन के समूहों (त्रिक) में व्यवस्थित करने का प्रयास किया। उनके सिद्धांत के अनुसार, जब तत्वों को उनके बढ़ते हुए परमाणु द्रव्यमान के क्रम में रखा जाता है तो तीन तत्वों का समूह बनता है, जिसमें मध्य वाले तत्व का परमाणु द्रव्यमान अन्य दो तत्वों के परमाणु द्रव्यमानों का लगभग औसत होता है।
उदाहरण: लिथियम (Li = 6.9), सोडियम (Na = 23), पोटेशियम (K = 39)। औसत = (6.9 + 39) / 2 = 22.95, जो सोडियम के परमाणु द्रव्यमान (23) के लगभग बराबर है।
सीमाएँ: डोबेराइनर उस समय ज्ञात सभी तत्वों को केवल तीन त्रिकों में ही वर्गीकृत कर पाए, इसलिए यह प्रणाली सफल नहीं रही।
अंग्रेज वैज्ञानिक जॉन न्यूलैंड्स ने ज्ञात तत्वों को परमाणु द्रव्यमान के आरोही क्रम में व्यवस्थित किया तथा पाया कि प्रत्येक आठवें तत्व का गुणधर्म पहले तत्व के गुणधर्म के समान होता है। उन्होंने इसकी तुलना संगीत के सुरों (सा, रे, गा, मा, पा, धा, नी) से की, इसलिए इसे अष्टक का नियम कहा गया। उदाहरण के लिए, लिथियम (Li) और आठवें तत्व सोडियम (Na) के गुण समान थे।
सीमाएँ:
रूसी रसायनज्ञ दमित्री इवानोविच मेंडेलीफ को आवर्त सारणी का मुख्य श्रेय दिया जाता है। उन्होंने तत्वों को उनके मूल गुणधर्म, परमाणु द्रव्यमान तथा रासायनिक गुणों की समानता के आधार पर व्यवस्थित किया। मेंडेलीफ का आवर्त नियम कहता है कि "तत्वों के गुणधर्म उनके परमाणु द्रव्यमानों का आवर्त फलन होते हैं।" उनकी सारणी में ऊर्ध्वाधर स्तंभों को समूह तथा क्षैतिज पंक्तियों को आवर्त कहा गया।
उपलब्धियाँ:
सीमाएँ:
1913 में हेनरी मोज़ले ने सिद्ध किया कि किसी तत्व का परमाणु क्रमांक (प्रोटॉनों की संख्या) उसके परमाणु द्रव्यमान से अधिक मूलभूत गुण है। आधुनिक आवर्त नियम कहता है कि "तत्वों के गुणधर्म उनके परमाणु क्रमांक का आवर्त फलन होते हैं।" आधुनिक आवर्त सारणी में 18 समूह तथा 7 आवर्त होते हैं। परमाणु क्रमांक के आधार पर मेंडेलीफ की सारणी की सभी सीमाएँ (समस्थानिक, कोबाल्ट-निकल क्रम) स्वतः हल हो गईं।
धातुएँ आवर्त सारणी के बाईं ओर एवं मध्य में स्थित होती हैं तथा विद्युत धनात्मक होती हैं। अधातुएँ दाईं ओर स्थित होती हैं तथा विद्युत ऋणात्मक होती हैं। धातुओं और अधातुओं को अलग करने वाली टेढ़ी-मेढ़ी रेखा पर स्थित बोरॉन, सिलिकॉन, जर्मेनियम, आर्सेनिक, एंटीमनी, टेल्यूरियम तथा पोलोनियम जैसे तत्व उपधातु कहलाते हैं, जिनमें धातु एवं अधातु दोनों के गुण होते हैं।
| वर्गीकरण | आधार | वर्ष | मुख्य विशेषता | सीमा |
|---|---|---|---|---|
| डोबेराइनर त्रिक | परमाणु द्रव्यमान | 1817 | मध्य तत्व का द्रव्यमान औसत | केवल 3 त्रिक |
| न्यूलैंड्स अष्टक | परमाणु द्रव्यमान | 1866 | 8वें तत्व में समानता | केवल Ca तक |
| मेंडेलीफ सारणी | परमाणु द्रव्यमान | 1869 | खाली स्थान, भविष्यवाणी | समस्थानिक, हाइड्रोजन |
| आधुनिक सारणी | परमाणु क्रमांक | 1913 | 18 समूह, 7 आवर्त | कोई नहीं |
| गुणधर्म | आवर्त में (बाएँ → दाएँ) | समूह में (ऊपर → नीचे) |
|---|---|---|
| संयोजकता | 1 से 4 तक बढ़ती, फिर घटती | समान रहती है |
| परमाणु आकार | घटता है | बढ़ता है |
| धात्विक गुण | घटता है | बढ़ता है |
| विद्युत ऋणात्मकता | बढ़ती है | घटती है |
तत्वों का आवर्त वर्गीकरण रसायन विज्ञान की मूलभूत उपलब्धि है, जिसने 118 तत्वों के अध्ययन को व्यवस्थित किया। डोबेराइनर के त्रिक और न्यूलैंड्स के अष्टक नियम ने आधार तैयार किया, परंतु इनकी सीमाएँ थीं। मेंडेलीफ ने परमाणु द्रव्यमान के आधार पर आवर्त सारणी बनाकर अनदेखे तत्वों की भविष्यवाणी की, परंतु समस्थानिकों और हाइड्रोजन के स्थान की समस्या बनी रही। मोज़ले के परमाणु क्रमांक सिद्धांत के आधार पर आधुनिक आवर्त सारणी में 18 समूह तथा 7 आवर्त हैं, जिनमें तत्वों के गुणधर्मों में निश्चित प्रवृत्तियाँ पाई जाती हैं। संयोजकता, परमाणु आकार, धात्विक गुण तथा विद्युत ऋणात्मकता में ये प्रवृत्तियाँ तत्वों के रासायनिक व्यवहार को समझने में सहायक हैं। आवर्त वर्गीकरण का ज्ञान रसायन विज्ञान की आधारशिला है।