🔬
🧬
🔭
🪐
🧪
← डैशबोर्ड पर वापस जाएँ
Font Size:

1. परिचय

पृथ्वी पर 118 से अधिक तत्व पाए जाते हैं, जिनमें से प्रत्येक के गुणधर्म भिन्न होते हैं। यदि प्रत्येक तत्व का अलग-अलग अध्ययन किया जाए तो यह अत्यंत कठिन एवं अव्यवस्थित हो जाएगा। इसलिए वैज्ञानिकों ने समान गुणधर्मों वाले तत्वों को एक साथ समूहों में व्यवस्थित करने की आवश्यकता अनुभव की, ताकि उनका अध्ययन सरल, व्यवस्थित और सार्थक हो सके। तत्वों को उनके गुणधर्मों के आधार पर एक व्यवस्थित क्रम में सजाने की इस प्रक्रिया को तत्वों का वर्गीकरण कहते हैं। प्रारंभ में तत्वों को केवल धातु और अधातु में बाँटा गया था, परंतु यह वर्गीकरण अधूरा था क्योंकि कुछ तत्व उपधातु भी होते हैं।

वर्गीकरण के क्रम में अनेक वैज्ञानिकों ने अपना योगदान दिया। जोहान डोबेराइनर ने त्रिक का सिद्धांत प्रस्तुत किया, न्यूलैंड्स ने अष्टक का नियम दिया, फिर दमित्री मेंडेलीफ ने परमाणु द्रव्यमान के आधार पर आवर्त सारणी का निर्माण किया। अंततः हेनरी मोज़ले ने परमाणु क्रमांक को आधार बनाकर आधुनिक आवर्त सारणी प्रतिपादित की। इस अध्याय में हम इन विभिन्न वर्गीकरण प्रणालियों, उनकी उपलब्धियों एवं सीमाओं तथा आधुनिक आवर्त सारणी में समूहों और आवर्तों में दिखाई देने वाली प्रवृत्तियों (संयोजकता, परमाणु आकार, धात्विक गुण, विद्युत ऋणात्मकता) का विस्तार से अध्ययन करेंगे।

2. डोबेराइनर के त्रिक (1817)

जर्मन रसायनज्ञ जोहान वोल्फगांग डोबेराइनर ने समान गुणधर्मों वाले तत्वों को तीन-तीन के समूहों (त्रिक) में व्यवस्थित करने का प्रयास किया। उनके सिद्धांत के अनुसार, जब तत्वों को उनके बढ़ते हुए परमाणु द्रव्यमान के क्रम में रखा जाता है तो तीन तत्वों का समूह बनता है, जिसमें मध्य वाले तत्व का परमाणु द्रव्यमान अन्य दो तत्वों के परमाणु द्रव्यमानों का लगभग औसत होता है।

उदाहरण: लिथियम (Li = 6.9), सोडियम (Na = 23), पोटेशियम (K = 39)। औसत = (6.9 + 39) / 2 = 22.95, जो सोडियम के परमाणु द्रव्यमान (23) के लगभग बराबर है।

सीमाएँ: डोबेराइनर उस समय ज्ञात सभी तत्वों को केवल तीन त्रिकों में ही वर्गीकृत कर पाए, इसलिए यह प्रणाली सफल नहीं रही।

3. न्यूलैंड्स का अष्टक सिद्धांत (1866)

अंग्रेज वैज्ञानिक जॉन न्यूलैंड्स ने ज्ञात तत्वों को परमाणु द्रव्यमान के आरोही क्रम में व्यवस्थित किया तथा पाया कि प्रत्येक आठवें तत्व का गुणधर्म पहले तत्व के गुणधर्म के समान होता है। उन्होंने इसकी तुलना संगीत के सुरों (सा, रे, गा, मा, पा, धा, नी) से की, इसलिए इसे अष्टक का नियम कहा गया। उदाहरण के लिए, लिथियम (Li) और आठवें तत्व सोडियम (Na) के गुण समान थे।

सीमाएँ:

  1. यह नियम केवल कैल्शियम (Ca) तक ही लागू होता था, क्योंकि कैल्शियम के बाद प्रत्येक आठवें तत्व का गुण पहले तत्व से मेल नहीं खाता था।
  2. न्यूलैंड्स ने कल्पना की थी कि प्रकृति में केवल 56 तत्व मौजूद हैं और भविष्य में कोई नया तत्व नहीं खोजा जाएगा।
  3. उन्होंने कुछ असमान तत्वों को एक ही स्वर के नीचे रख दिया, जैसे कोबाल्ट और निकल को हैलोजन के साथ।

4. मेंडेलीफ की आवर्त सारणी (1869)

रूसी रसायनज्ञ दमित्री इवानोविच मेंडेलीफ को आवर्त सारणी का मुख्य श्रेय दिया जाता है। उन्होंने तत्वों को उनके मूल गुणधर्म, परमाणु द्रव्यमान तथा रासायनिक गुणों की समानता के आधार पर व्यवस्थित किया। मेंडेलीफ का आवर्त नियम कहता है कि "तत्वों के गुणधर्म उनके परमाणु द्रव्यमानों का आवर्त फलन होते हैं।" उनकी सारणी में ऊर्ध्वाधर स्तंभों को समूह तथा क्षैतिज पंक्तियों को आवर्त कहा गया।

उपलब्धियाँ:

  1. भविष्य के तत्वों की भविष्यवाणी: उन्होंने अपनी सारणी में खाली स्थान छोड़े और अनदेखे तत्वों के अस्तित्व की भविष्यवाणी की। एका-बोरॉन → स्कैंडियम, एका-एलुमिनियम → गैलियम तथा एका-सिलिकॉन → जर्मेनियम।
  2. उत्कृष्ट गैसों का स्थान: अक्रिय गैसों की खोज के बाद उन्हें बिना सारणी में कोई बदलाव किए एक अलग समूह में रखा गया।
  3. द्रव्यमान में सुधार: कुछ तत्वों (जैसे बेरिलियम) के परमाणु द्रव्यमान सही किए गए।

सीमाएँ:

  1. हाइड्रोजन का स्थान: हाइड्रोजन के गुण क्षार धातुओं (समूह 1) तथा हैलोजन (समूह 17) दोनों से मिलते हैं, इसलिए इसे कोई निश्चित स्थान नहीं दिया जा सका।
  2. समस्थानिकों का स्थान: समस्थानिकों (समान परमाणु क्रमांक, भिन्न द्रव्यमान) को द्रव्यमान के आधार पर अलग-अलग स्थान मिलना चाहिए था, जो संभव नहीं था।
  3. असामान्य क्रम: कुछ स्थानों पर अधिक द्रव्यमान वाले तत्व को कम द्रव्यमान वाले तत्व से पहले रखा गया, जैसे Co (58.9) को Ni (58.7) से पहले।

5. आधुनिक आवर्त सारणी (1913)

1913 में हेनरी मोज़ले ने सिद्ध किया कि किसी तत्व का परमाणु क्रमांक (प्रोटॉनों की संख्या) उसके परमाणु द्रव्यमान से अधिक मूलभूत गुण है। आधुनिक आवर्त नियम कहता है कि "तत्वों के गुणधर्म उनके परमाणु क्रमांक का आवर्त फलन होते हैं।" आधुनिक आवर्त सारणी में 18 समूह तथा 7 आवर्त होते हैं। परमाणु क्रमांक के आधार पर मेंडेलीफ की सारणी की सभी सीमाएँ (समस्थानिक, कोबाल्ट-निकल क्रम) स्वतः हल हो गईं।

समूहों एवं आवर्तों में प्रवृत्तियाँ

  1. संयोजकता: आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर संयोजकता पहले 1 से 4 तक बढ़ती है और फिर 0 तक घटती है; समूह में सभी तत्वों की संयोजकता समान होती है।
  2. परमाणु का आकार: आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर नाभिकीय आवेश बढ़ने से परमाणु त्रिज्या घटती है; समूह में ऊपर से नीचे जाने पर नए कोश जुड़ने से परमाणु आकार बढ़ता है।
  3. धात्विक गुणधर्म: आवर्त में बाएँ से दाएँ धात्विक गुण घटता है; समूह में नीचे जाने पर धात्विक गुण बढ़ता है।
  4. विद्युत ऋणात्मकता: यह आवर्त में बाएँ से दाएँ बढ़ती है तथा समूह में नीचे जाने पर घटती है।

6. धातु, अधातु एवं उपधातु

धातुएँ आवर्त सारणी के बाईं ओर एवं मध्य में स्थित होती हैं तथा विद्युत धनात्मक होती हैं। अधातुएँ दाईं ओर स्थित होती हैं तथा विद्युत ऋणात्मक होती हैं। धातुओं और अधातुओं को अलग करने वाली टेढ़ी-मेढ़ी रेखा पर स्थित बोरॉन, सिलिकॉन, जर्मेनियम, आर्सेनिक, एंटीमनी, टेल्यूरियम तथा पोलोनियम जैसे तत्व उपधातु कहलाते हैं, जिनमें धातु एवं अधातु दोनों के गुण होते हैं।

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: वर्गीकरण प्रणालियों की तुलना

वर्गीकरण आधार वर्ष मुख्य विशेषता सीमा
डोबेराइनर त्रिक परमाणु द्रव्यमान 1817 मध्य तत्व का द्रव्यमान औसत केवल 3 त्रिक
न्यूलैंड्स अष्टक परमाणु द्रव्यमान 1866 8वें तत्व में समानता केवल Ca तक
मेंडेलीफ सारणी परमाणु द्रव्यमान 1869 खाली स्थान, भविष्यवाणी समस्थानिक, हाइड्रोजन
आधुनिक सारणी परमाणु क्रमांक 1913 18 समूह, 7 आवर्त कोई नहीं

तालिका 2: आवर्त एवं समूह में प्रवृत्तियाँ

गुणधर्म आवर्त में (बाएँ → दाएँ) समूह में (ऊपर → नीचे)
संयोजकता 1 से 4 तक बढ़ती, फिर घटती समान रहती है
परमाणु आकार घटता है बढ़ता है
धात्विक गुण घटता है बढ़ता है
विद्युत ऋणात्मकता बढ़ती है घटती है

माइंड मैप

graph TD A["तत्वों का आवर्त वर्गीकरण"] --> B["डोबेराइनर त्रिक"] A --> C["न्यूलैंड्स अष्टक"] A --> D["मेंडेलीफ सारणी"] A --> E["आधुनिक आवर्त सारणी"] D --> D1["परमाणु द्रव्यमान आधार"] D --> D2["एका तत्वों की भविष्यवाणी"] E --> E1["परमाणु क्रमांक आधार"] E --> E2["18 समूह, 7 आवर्त"] E --> F["प्रवृत्तियाँ"] F --> F1["संयोजकता"] F --> F2["परमाणु आकार"] F --> F3["धात्विक गुण"] F --> F4["विद्युत ऋणात्मकता"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

आरेख 1: वर्गीकरण का क्रमिक विकास

तत्वों के वर्गीकरण का विकास तत्वों का वर्गीकरण डोबेराइनर त्रिक 1817, द्रव्यमान न्यूलैंड्स अष्टक 1866, द्रव्यमान मेंडेलीफ सारणी 1869, द्रव्यमान आधुनिक आवर्त सारणी मोज़ले 1913, परमाणु क्रमांक, 18 समूह, 7 आवर्त मेंडेलीफ की सीमाएँ: हाइड्रोजन, समस्थानिक, Co-Ni क्रम स्वर्ण नियम आधुनिक आवर्त नियम: गुणधर्म परमाणु क्रमांक का आवर्त फलन है

आरेख 2: आवर्त में परमाणु आकार की प्रवृत्ति

आवर्त में परमाणु आकार की प्रवृत्ति Li Be N F सबसे बड़ा आकार सबसे छोटा आकार बाएँ → दाएँ (आवर्त में) परमाणु आकार घटता है कारण: नाभिकीय आवेश बढ़ता है, इलेक्ट्रॉन नाभिक की ओर खिंचते हैं Golden Rule आवर्त में आकार घटता है, समूह में आकार बढ़ता है

सामान्य गलतियाँ

  1. मेंडेलीफ की सारणी को परमाणु क्रमांक पर आधारित बता दिया जाता है; वास्तव में यह परमाणु द्रव्यमान पर आधारित थी।
  2. डोबेराइनर त्रिक का औसत सूत्र गलत लिखा जाता है; मध्य तत्व का द्रव्यमान दोनों सिरों के तत्वों के द्रव्यमानों का औसत होता है।
  3. न्यूलैंड्स अष्टक को "प्रत्येक सातवें तत्व में समानता" लिख दिया जाता है, जबकि नियम आठवें तत्व के बारे में है।
  4. परमाणु आकार में समूह में ऊपर से नीचे जाने पर घटता है यह गलत है; समूह में आकार बढ़ता है।
  5. उपधातुओं के उदाहरणों (सिलिकॉन, जर्मेनियम) में भूल होती है, इन्हें अधातु समझ लिया जाता है।
  6. विद्युत ऋणात्मकता समूह में नीचे जाने पर बढ़ती है यह गलत है; यह घटती है।
  7. मेंडेलीफ द्वारा भविष्यवाणी किए गए एका-एलुमिनियम को गैलियम के स्थान पर दूसरा तत्व बता दिया जाता है।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. चारों वर्गीकरण प्रणालियों (त्रिक, अष्टक, मेंडेलीफ, आधुनिक) के वर्ष, वैज्ञानिक का नाम तथा आधार याद रखें।
  2. मेंडेलीफ की उपलब्धियों में "एका तत्वों की भविष्यवाणी" तथा सीमाओं में "हाइड्रोजन, समस्थानिक, Co-Ni क्रम" लिखें।
  3. आधुनिक आवर्त नियम की परिभाषा मोज़ले के नाम के साथ लिखें।
  4. आवर्त और समूह में चारों प्रवृत्तियों (संयोजकता, आकार, धात्विक गुण, विद्युत ऋणात्मकता) की तुलना तालिका रूप में करें।
  5. उपधातुओं के उदाहरण तथा उनकी स्थिति (टेढ़ी-मेढ़ी रेखा पर) लिखें।
  6. समस्थानिकों के कारण मेंडेलीफ की सारणी की सीमा का उल्लेख करें।
  7. लिथियम-सोडियम-पोटेशियम त्रिक का संख्यात्मक औसत निकालकर दिखाएँ।

निष्कर्ष

तत्वों का आवर्त वर्गीकरण रसायन विज्ञान की मूलभूत उपलब्धि है, जिसने 118 तत्वों के अध्ययन को व्यवस्थित किया। डोबेराइनर के त्रिक और न्यूलैंड्स के अष्टक नियम ने आधार तैयार किया, परंतु इनकी सीमाएँ थीं। मेंडेलीफ ने परमाणु द्रव्यमान के आधार पर आवर्त सारणी बनाकर अनदेखे तत्वों की भविष्यवाणी की, परंतु समस्थानिकों और हाइड्रोजन के स्थान की समस्या बनी रही। मोज़ले के परमाणु क्रमांक सिद्धांत के आधार पर आधुनिक आवर्त सारणी में 18 समूह तथा 7 आवर्त हैं, जिनमें तत्वों के गुणधर्मों में निश्चित प्रवृत्तियाँ पाई जाती हैं। संयोजकता, परमाणु आकार, धात्विक गुण तथा विद्युत ऋणात्मकता में ये प्रवृत्तियाँ तत्वों के रासायनिक व्यवहार को समझने में सहायक हैं। आवर्त वर्गीकरण का ज्ञान रसायन विज्ञान की आधारशिला है।