कार्बन एक अधातु है जिसका प्रतीक C तथा परमाणु क्रमांक 6 है। इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 4 है, अर्थात् इसके संयोजकता कोश में 4 इलेक्ट्रॉन होते हैं, इसलिए इसकी संयोजकता 4 है तथा इसे चतुष्संयोजक (Tetravalent) तत्व कहा जाता है। कार्बन की यह चतुष्संयोजकता तथा श्रृंखलन (Catenation) की क्षमता के कारण ही पृथ्वी पर कार्बन के लाखों यौगिक पाए जाते हैं, जो अन्य किसी भी तत्व के यौगिकों से कहीं अधिक हैं। कार्बन जीवित जीवों की मूलभूत इकाइयों - कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन तथा न्यूक्लिक अम्ल - का मुख्य घटक है। कोयला, पेट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैस जैसे ऊर्जा स्रोत भी कार्बन यौगिकों से ही निर्मित हैं।
कार्बन अपने नाभिक में केवल 6 प्रोटॉन होने के कारण न तो आसानी से C⁴⁺ धनायन बना सकता है और न ही C⁴⁻ ऋणायन बना सकता है। C⁴⁺ बनाने के लिए 4 इलेक्ट्रॉन त्यागने में अत्यधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है तथा C⁴⁻ बनाने पर 6 प्रोटॉन वाला नाभिक 10 इलेक्ट्रॉनों को धारण नहीं कर सकता। इसलिए कार्बन न तो इलेक्ट्रॉन खोता है और न ही ग्रहण करता है, वरन् अपने इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी करके सहसंयोजी आबंध बनाता है। इस अध्याय में हम सहसंयोजी आबंध, हाइड्रोकार्बन, समजातीय श्रेणी, प्रकार्यात्मक समूह, कार्बन यौगिकों के रासायनिक गुणधर्म, एथेनॉल एवं एथेनॉइक अम्ल तथा साबुन और अपमार्जकों का अध्ययन करेंगे।
दो परमाणुओं के बीच इलेक्ट्रॉन के एक युग्म की साझेदारी द्वारा बनने वाले आबंध को सहसंयोजी आबंध कहते हैं। सहसंयोजी आबंध तीन प्रकार के होते हैं:
सहसंयोजी यौगिकों के भौतिक गुण: इनके अणुओं के बीच दुर्बल अंतराणुक बल होता है, इसलिए इनके गलनांक और क्वथनांक कम होते हैं। इनमें मुक्त इलेक्ट्रॉन या आयन नहीं होते, इसलिए ये विद्युत के कुचालक होते हैं।
प्रकृति में कार्बन के लाखों यौगिक पाए जाते हैं, जिनके मुख्य कारण हैं:
इन्हीं गुणों के कारण कार्बन विभिन्न प्रकार के यौगिक बना सकता है, जिन्हें अध्ययन की सुविधा के लिए कार्बनिक यौगिकों की श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है।
वे यौगिक जो केवल कार्बन और हाइड्रोजन से बने होते हैं, हाइड्रोकार्बन कहलाते हैं। ये दो प्रकार के होते हैं:
इनमें कार्बन परमाणुओं के बीच केवल एकल आबंध होता है। इनका सामान्य सूत्र CₙH₂ₙ₊₂ है। मेथेन (CH₄), एथेन (C₂H₆) तथा प्रोपेन (C₃H₈) एल्केन के उदाहरण हैं।
इनमें कार्बन परमाणुओं के बीच कम से कम एक द्वि आबंध या त्रि आबंध होता है।
यौगिकों की वह श्रृंखला जिसमें क्रमागत सदस्यों में -CH₂- का अंतर होता है तथा समान प्रकार्यात्मक समूह उपस्थित होता है, समजातीय श्रेणी कहलाती है। इसके दो क्रमागत सदस्यों के आणविक द्रव्यमान में 14u का अंतर होता है। इस श्रेणी के सदस्यों के रासायनिक गुण समान होते हैं, परंतु आणविक द्रव्यमान बढ़ने पर गलनांक और क्वथनांक में क्रमिक वृद्धि होती है। एल्कोहल की समजातीय श्रेणी के उदाहरण CH₃OH, C₂H₅OH तथा C₃H₇OH हैं।
प्रकार्यात्मक समूह हाइड्रोकार्बन श्रृंखला में उपस्थित वह परमाणु या परमाणुओं का समूह है जो यौगिक के रासायनिक गुणों का निर्धारण करता है। मुख्य प्रकार्यात्मक समूह निम्न हैं:
एथेनॉल कमरे के ताप पर द्रव है और एक अच्छा विलायक है, जिसका उपयोग टिंचर तथा कफ सिरप में होता है। यह सोडियम से क्रिया करके हाइड्रोजन गैस देता है:
$2Na + 2CH_3CH_2OH \rightarrow 2CH_3CH_2ONa + H_2 \uparrow$
एथेनॉल को गर्म सांद्र H₂SO₄ (443 K) के साथ गर्म करने पर निर्जलीकरण द्वारा एथीन बनती है:
$CH_3CH_2OH \xrightarrow{H_2SO_4} CH_2=CH_2 + H_2O$
एथेनॉइक अम्ल का 3-4% विलयन सिरका कहलाता है। शुद्ध एथेनॉइक अम्ल का गलनांक 290 K है, इसलिए सर्दियों में यह जम जाता है और इसे ग्लैशियल एसिटिक अम्ल कहते हैं। अम्ल और एल्कोहल की अभिक्रिया से मीठी गंध वाले एस्टर बनते हैं, इस अभिक्रिया को एस्टरीकरण कहते हैं:
$CH_3COOH + C_2H_5OH \xrightarrow{H^+} CH_3COOC_2H_5 + H_2O$
एस्टर को NaOH के साथ गर्म करने पर एल्कोहल तथा कार्बोक्सिलिक अम्ल का सोडियम लवण (साबुन) पुनः प्राप्त होता है, इस अभिक्रिया को साबुनीकरण कहते हैं।
साबुन लंबी श्रृंखला वाले कार्बोक्सिलिक अम्लों के सोडियम या पोटेशियम लवण होते हैं। साबुन के अणु के दो सिरे होते हैं - जलरागी सिरा (आयनिक) जो जल में घुलता है तथा जलविरागी सिरा (कार्बन श्रृंखला) जो तेल या मैल में घुलता है। जल में साबुन के अणु गोलाकार मिसेल संरचना बनाते हैं, जिसमें जलविरागी सिरा मैल की ओर तथा जलरागी सिरा जल की ओर होता है। कठोर जल में उपस्थित कैल्सियम और मैग्नीशियम आयन साबुन के साथ अघुलनशील स्कम बनाते हैं, जिससे झाग नहीं बनता। अपमार्जक लंबी श्रृंखला वाले सल्फोनिक अम्लों के सोडियम लवण होते हैं, जो कठोर जल में स्कम नहीं बनाते और प्रभावी होते हैं।
| प्रकार | आबंध | सामान्य सूत्र | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| एल्केन | एकल | CₙH₂ₙ₊₂ | मेथेन (CH₄) |
| एल्कीन | द्वि | CₙH₂ₙ | एथीन (C₂H₄) |
| एल्काइन | त्रि | CₙH₂ₙ₋₂ | एथाइन (C₂H₂) |
| प्रकार्यात्मक समूह | सूत्र | यौगिक |
|---|---|---|
| एल्कोहल | -OH | एथेनॉल |
| एल्डिहाइड | -CHO | मेथेनल |
| कीटोन | >C=O | प्रोपेनोन |
| कार्बोक्सिलिक अम्ल | -COOH | एथेनॉइक अम्ल |
कार्बन अपनी चतुष्संयोजकता और श्रृंखलन क्षमता के कारण जीवन का आधार तत्व है। कार्बन इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी द्वारा सहसंयोजी आबंध बनाता है, जो एकल, द्वि या त्रि प्रकार के हो सकते हैं। हाइड्रोकार्बन संतृप्त (एल्केन) तथा असंतृप्त (एल्कीन, एल्काइन) होते हैं। प्रकार्यात्मक समूह यौगिकों के रासायनिक गुणों का निर्धारण करते हैं। कार्बन यौगिकों की दहन, ऑक्सीकरण, संकलन तथा प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ महत्वपूर्ण हैं। एथेनॉल और एथेनॉइक अम्ल दैनिक जीवन में प्रयुक्त महत्वपूर्ण कार्बन यौगिक हैं, जिनसे एस्टर और साबुन बनते हैं। साबुन और अपमार्जक सफाई के साधन हैं, जिनकी क्रियाविधि मिसेल निर्माण पर आधारित है। कार्बन के यौगिक मानव जीवन, उद्योग तथा ऊर्जा के क्षेत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।