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1. परिचय

कार्बन एक अधातु है जिसका प्रतीक C तथा परमाणु क्रमांक 6 है। इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 4 है, अर्थात् इसके संयोजकता कोश में 4 इलेक्ट्रॉन होते हैं, इसलिए इसकी संयोजकता 4 है तथा इसे चतुष्संयोजक (Tetravalent) तत्व कहा जाता है। कार्बन की यह चतुष्संयोजकता तथा श्रृंखलन (Catenation) की क्षमता के कारण ही पृथ्वी पर कार्बन के लाखों यौगिक पाए जाते हैं, जो अन्य किसी भी तत्व के यौगिकों से कहीं अधिक हैं। कार्बन जीवित जीवों की मूलभूत इकाइयों - कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन तथा न्यूक्लिक अम्ल - का मुख्य घटक है। कोयला, पेट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैस जैसे ऊर्जा स्रोत भी कार्बन यौगिकों से ही निर्मित हैं।

कार्बन अपने नाभिक में केवल 6 प्रोटॉन होने के कारण न तो आसानी से C⁴⁺ धनायन बना सकता है और न ही C⁴⁻ ऋणायन बना सकता है। C⁴⁺ बनाने के लिए 4 इलेक्ट्रॉन त्यागने में अत्यधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है तथा C⁴⁻ बनाने पर 6 प्रोटॉन वाला नाभिक 10 इलेक्ट्रॉनों को धारण नहीं कर सकता। इसलिए कार्बन न तो इलेक्ट्रॉन खोता है और न ही ग्रहण करता है, वरन् अपने इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी करके सहसंयोजी आबंध बनाता है। इस अध्याय में हम सहसंयोजी आबंध, हाइड्रोकार्बन, समजातीय श्रेणी, प्रकार्यात्मक समूह, कार्बन यौगिकों के रासायनिक गुणधर्म, एथेनॉल एवं एथेनॉइक अम्ल तथा साबुन और अपमार्जकों का अध्ययन करेंगे।

2. सहसंयोजी आबंध एवं इसके प्रकार

दो परमाणुओं के बीच इलेक्ट्रॉन के एक युग्म की साझेदारी द्वारा बनने वाले आबंध को सहसंयोजी आबंध कहते हैं। सहसंयोजी आबंध तीन प्रकार के होते हैं:

  1. एकल आबंध: जब दो परमाणु एक-एक इलेक्ट्रॉन की साझेदारी करते हैं, जैसे H₂, Cl₂ और CH₄ में। इसे H-H द्वारा दर्शाया जाता है।
  2. द्वि आबंध: जब दो परमाणु दो-दो इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी करते हैं, जैसे O₂ और CO₂ में। इसे O=O द्वारा दर्शाया जाता है।
  3. त्रि आबंध: जब दो परमाणु तीन-तीन इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी करते हैं, जैसे N₂ में। इसे N≡N द्वारा दर्शाया जाता है।

सहसंयोजी यौगिकों के भौतिक गुण: इनके अणुओं के बीच दुर्बल अंतराणुक बल होता है, इसलिए इनके गलनांक और क्वथनांक कम होते हैं। इनमें मुक्त इलेक्ट्रॉन या आयन नहीं होते, इसलिए ये विद्युत के कुचालक होते हैं।

3. कार्बन की सर्वतोमुखी प्रकृति

प्रकृति में कार्बन के लाखों यौगिक पाए जाते हैं, जिनके मुख्य कारण हैं:

  1. श्रृंखलन: कार्बन की अपने ही परमाणुओं के साथ आबंध बनाकर लंबी श्रृंखला, शाखित श्रृंखला या वलय बनाने की क्षमता को श्रृंखलन कहते हैं। यह क्षमता कार्बन की चतुष्संयोजकता तथा कार्बन-कार्बन आबंध की स्थिरता के कारण होती है।
  2. चतुष्संयोजकता: कार्बन की संयोजकता 4 होने से यह कार्बन या ऑक्सीजन, हाइड्रोजन, नाइट्रोजन, सल्फर आदि परमाणुओं के साथ आसानी से आबंध बना सकता है।

इन्हीं गुणों के कारण कार्बन विभिन्न प्रकार के यौगिक बना सकता है, जिन्हें अध्ययन की सुविधा के लिए कार्बनिक यौगिकों की श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है।

4. हाइड्रोकार्बन एवं उनके प्रकार

वे यौगिक जो केवल कार्बन और हाइड्रोजन से बने होते हैं, हाइड्रोकार्बन कहलाते हैं। ये दो प्रकार के होते हैं:

(क) संतृप्त हाइड्रोकार्बन (एल्केन)

इनमें कार्बन परमाणुओं के बीच केवल एकल आबंध होता है। इनका सामान्य सूत्र CₙH₂ₙ₊₂ है। मेथेन (CH₄), एथेन (C₂H₆) तथा प्रोपेन (C₃H₈) एल्केन के उदाहरण हैं।

(ख) असंतृप्त हाइड्रोकार्बन

इनमें कार्बन परमाणुओं के बीच कम से कम एक द्वि आबंध या त्रि आबंध होता है।

5. समजातीय श्रेणी एवं प्रकार्यात्मक समूह

यौगिकों की वह श्रृंखला जिसमें क्रमागत सदस्यों में -CH₂- का अंतर होता है तथा समान प्रकार्यात्मक समूह उपस्थित होता है, समजातीय श्रेणी कहलाती है। इसके दो क्रमागत सदस्यों के आणविक द्रव्यमान में 14u का अंतर होता है। इस श्रेणी के सदस्यों के रासायनिक गुण समान होते हैं, परंतु आणविक द्रव्यमान बढ़ने पर गलनांक और क्वथनांक में क्रमिक वृद्धि होती है। एल्कोहल की समजातीय श्रेणी के उदाहरण CH₃OH, C₂H₅OH तथा C₃H₇OH हैं।

प्रकार्यात्मक समूह हाइड्रोकार्बन श्रृंखला में उपस्थित वह परमाणु या परमाणुओं का समूह है जो यौगिक के रासायनिक गुणों का निर्धारण करता है। मुख्य प्रकार्यात्मक समूह निम्न हैं:

  1. हैलोजन (-Cl, -Br): हैलोएल्केन, जैसे क्लोरोमेथेन (CH₃Cl)।
  2. एल्कोहल (-OH): एथेनॉल (C₂H₅OH)।
  3. एल्डिहाइड (-CHO): मेथेनल (HCHO)।
  4. कीटोन (>C=O): प्रोपेनोन (CH₃COCH₃)।
  5. कार्बोक्सिलिक अम्ल (-COOH): एथेनॉइक अम्ल (CH₃COOH)।

6. कार्बन यौगिकों के रासायनिक गुणधर्म

  1. दहन: कार्बन यौगिक ऑक्सीजन में जलकर ऊष्मा, प्रकाश तथा CO₂ देते हैं। संतृप्त हाइड्रोकार्बन स्वच्छ नीली ज्वाला देते हैं जबकि असंतृप्त हाइड्रोकार्बन पीली, धुएँ वाली ज्वाला देते हैं।
  2. ऑक्सीकरण: एथेनॉल को क्षारीय KMnO₄ या अम्लीकृत K₂Cr₂O₇ से गर्म करने पर एथेनॉइक अम्ल में बदल जाता है। $CH_3CH_2OH \xrightarrow{[O]} CH_3COOH$
  3. संकलन अभिक्रिया: असंतृप्त हाइड्रोकार्बन निकेल या पैलेडियम उत्प्रेरक की उपस्थिति में हाइड्रोजन जोड़कर संतृप्त हाइड्रोकार्बन बनाते हैं। इसी विधि से वनस्पति तेलों (असंतृप्त) को वनस्पति घी (संतृप्त) में बदला जाता है।
  4. प्रतिस्थापन अभिक्रिया: सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में क्लोरीन एल्केन से हाइड्रोजन को एक-एक करके विस्थापित कर देती है। $CH_4 + Cl_2 \rightarrow CH_3Cl + HCl$

7. एथेनॉल एवं एथेनॉइक अम्ल

एथेनॉल (C₂H₅OH)

एथेनॉल कमरे के ताप पर द्रव है और एक अच्छा विलायक है, जिसका उपयोग टिंचर तथा कफ सिरप में होता है। यह सोडियम से क्रिया करके हाइड्रोजन गैस देता है:

$2Na + 2CH_3CH_2OH \rightarrow 2CH_3CH_2ONa + H_2 \uparrow$

एथेनॉल को गर्म सांद्र H₂SO₄ (443 K) के साथ गर्म करने पर निर्जलीकरण द्वारा एथीन बनती है:

$CH_3CH_2OH \xrightarrow{H_2SO_4} CH_2=CH_2 + H_2O$

एथेनॉइक अम्ल (CH₃COOH)

एथेनॉइक अम्ल का 3-4% विलयन सिरका कहलाता है। शुद्ध एथेनॉइक अम्ल का गलनांक 290 K है, इसलिए सर्दियों में यह जम जाता है और इसे ग्लैशियल एसिटिक अम्ल कहते हैं। अम्ल और एल्कोहल की अभिक्रिया से मीठी गंध वाले एस्टर बनते हैं, इस अभिक्रिया को एस्टरीकरण कहते हैं:

$CH_3COOH + C_2H_5OH \xrightarrow{H^+} CH_3COOC_2H_5 + H_2O$

एस्टर को NaOH के साथ गर्म करने पर एल्कोहल तथा कार्बोक्सिलिक अम्ल का सोडियम लवण (साबुन) पुनः प्राप्त होता है, इस अभिक्रिया को साबुनीकरण कहते हैं।

8. साबुन एवं अपमार्जक

साबुन लंबी श्रृंखला वाले कार्बोक्सिलिक अम्लों के सोडियम या पोटेशियम लवण होते हैं। साबुन के अणु के दो सिरे होते हैं - जलरागी सिरा (आयनिक) जो जल में घुलता है तथा जलविरागी सिरा (कार्बन श्रृंखला) जो तेल या मैल में घुलता है। जल में साबुन के अणु गोलाकार मिसेल संरचना बनाते हैं, जिसमें जलविरागी सिरा मैल की ओर तथा जलरागी सिरा जल की ओर होता है। कठोर जल में उपस्थित कैल्सियम और मैग्नीशियम आयन साबुन के साथ अघुलनशील स्कम बनाते हैं, जिससे झाग नहीं बनता। अपमार्जक लंबी श्रृंखला वाले सल्फोनिक अम्लों के सोडियम लवण होते हैं, जो कठोर जल में स्कम नहीं बनाते और प्रभावी होते हैं।

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: हाइड्रोकार्बन के प्रकार

प्रकार आबंध सामान्य सूत्र उदाहरण
एल्केन एकल CₙH₂ₙ₊₂ मेथेन (CH₄)
एल्कीन द्वि CₙH₂ₙ एथीन (C₂H₄)
एल्काइन त्रि CₙH₂ₙ₋₂ एथाइन (C₂H₂)

तालिका 2: प्रकार्यात्मक समूह

प्रकार्यात्मक समूह सूत्र यौगिक
एल्कोहल -OH एथेनॉल
एल्डिहाइड -CHO मेथेनल
कीटोन >C=O प्रोपेनोन
कार्बोक्सिलिक अम्ल -COOH एथेनॉइक अम्ल

माइंड मैप

graph TD A["कार्बन एवं उसके यौगिक"] --> B["सहसंयोजी आबंध"] A --> C["हाइड्रोकार्बन"] A --> D["प्रकार्यात्मक समूह"] A --> E["रासायनिक अभिक्रियाएँ"] A --> F["साबुन एवं अपमार्जक"] B --> B1["एकल, द्वि, त्रि आबंध"] C --> C1["संतृप्त - एल्केन"] C --> C2["असंतृप्त - एल्कीन, एल्काइन"] E --> E1["दहन"] E --> E2["ऑक्सीकरण"] E --> E3["संकलन"] E --> E4["प्रतिस्थापन"] F --> F1["मिसेल निर्माण"] F --> F2["साबुनीकरण"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

आरेख 1: सहसंयोजी आबंध के प्रकार

सहसंयोजी आबंध के प्रकार H H एकल आबंध H₂, CH₄ O O द्वि आबंध O₂, CO₂ त्रि आबंध (N ≡ N) तीन-तीन इलेक्ट्रॉन साझेदारी (N₂) सबसे प्रबल आबंध गुण कम गलनांक, कम क्वथनांक विद्युत के कुचालक स्वर्ण नियम सहसंयोजी आबंध में इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी होती है

आरेख 2: एस्टरीकरण एवं साबुनीकरण

एस्टरीकरण एवं साबुनीकरण एथेनॉइक अम्ल CH₃COOH एथेनॉल C₂H₅OH H+ एस्टर + जल CH₃COOC₂H₅ + H₂O मीठी गंध, इत्र में उपयोग NaOH (साबुनीकरण) एल्कोहल + सोडियम लवण (साबुन) साबुनीकरण एस्टरीकरण का उत्क्रम है Golden Rule अम्ल + एल्कोहल → एस्टर + जल (एस्टरीकरण)

सामान्य गलतियाँ

  1. छात्र कार्बन की संयोजकता 2 या 6 लिख देते हैं; कार्बन की संयोजकता सदैव 4 होती है।
  2. एल्कीन का सामान्य सूत्र CₙH₂ₙ₊₂ लिख दिया जाता है, जबकि एल्कीन का सूत्र CₙH₂ₙ है।
  3. द्वि आबंध को संतृप्त यौगिक समझ लिया जाता है; द्वि या त्रि आबंध वाले यौगिक असंतृप्त होते हैं।
  4. एस्टरीकरण और साबुनीकरण को एक ही प्रक्रिया मान लिया जाता है; एस्टरीकरण में एस्टर बनता है जबकि साबुनीकरण में एस्टर से साबुन प्राप्त होता है।
  5. एथेनॉल और एथेनॉइक अम्ल के सूत्रों में भ्रम होता है; एथेनॉल C₂H₅OH है जबकि एथेनॉइक अम्ल CH₃COOH है।
  6. मिसेल में जलरागी और जलविरागी सिरे की स्थिति उल्टी लिख दी जाती है; जलविरागी सिरा मैल की ओर होता है।
  7. साबुन कठोर जल में अच्छा झाग देता है यह मान लिया जाता है, जबकि कठोर जल में साबुन स्कम बनाता है; अपमार्जक प्रभावी होते हैं।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. सहसंयोजी आबंध की परिभाषा तथा एकल, द्वि, त्रि आबंध के उदाहरण लिखने का अभ्यास करें।
  2. एल्केन, एल्कीन, एल्काइन के सामान्य सूत्र तथा पहले दो सदस्यों के नाम रटें।
  3. समजातीय श्रेणी की तीन विशेषताएँ (CH₂ अंतर, 14u द्रव्यमान अंतर, समान रासायनिक गुण) लिखें।
  4. प्रकार्यात्मक समूहों के सूत्र एवं यौगिकों के उदाहरण याद रखें।
  5. एस्टरीकरण और साबुनीकरण की रासायनिक समीकरणें लिखना सीखें।
  6. वनस्पति तेल का वनस्पति घी में बदलना (हाइड्रोजनीकरण) संकलन अभिक्रिया का उदाहरण है, इसे लिखें।
  7. साबुन और अपमार्जक में अंतर लिखते समय कठोर जल में स्कम बनने की घटना का उल्लेख करें।
  8. ग्लैशियल एसिटिक अम्ल की व्याख्या में 290 K गलनांक का उल्लेख करें।

निष्कर्ष

कार्बन अपनी चतुष्संयोजकता और श्रृंखलन क्षमता के कारण जीवन का आधार तत्व है। कार्बन इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी द्वारा सहसंयोजी आबंध बनाता है, जो एकल, द्वि या त्रि प्रकार के हो सकते हैं। हाइड्रोकार्बन संतृप्त (एल्केन) तथा असंतृप्त (एल्कीन, एल्काइन) होते हैं। प्रकार्यात्मक समूह यौगिकों के रासायनिक गुणों का निर्धारण करते हैं। कार्बन यौगिकों की दहन, ऑक्सीकरण, संकलन तथा प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ महत्वपूर्ण हैं। एथेनॉल और एथेनॉइक अम्ल दैनिक जीवन में प्रयुक्त महत्वपूर्ण कार्बन यौगिक हैं, जिनसे एस्टर और साबुन बनते हैं। साबुन और अपमार्जक सफाई के साधन हैं, जिनकी क्रियाविधि मिसेल निर्माण पर आधारित है। कार्बन के यौगिक मानव जीवन, उद्योग तथा ऊर्जा के क्षेत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।