पृथ्वी पर उपलब्ध तत्वों को उनके गुणों के आधार पर मुख्यतः तीन वर्गों में बाँटा जाता है - धातु, अधातु एवं उपधातु। आवर्त सारणी में कुल तत्वों में से लगभग 118 तत्वों में से अधिकांश धातुएँ हैं। धातुएँ चमकदार, कठोर तथा ऊष्मा और विद्युत की सुचालक होती हैं, जबकि अधातुएँ सामान्यतः मुलायम तथा कुचालक होती हैं। सोना, चाँदी, लोहा, ताँबा, एल्युमिनियम धातुओं के उदाहरण हैं, जबकि ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, कार्बन, सल्फर तथा फॉस्फोरस अधातुओं के उदाहरण हैं। धातु और अधातु की कुछ सीमाओं पर अनेक अपवाद पाए जाते हैं, जैसे ब्रोमीन एक द्रव अधातु नहीं बल्कि द्रव अधातु नहीं, बल्कि एक द्रव अधातु नहीं - वास्तव में ब्रोमीन एक द्रव अधातु नहीं, वरन् एक द्रव अधातु के स्थान पर एक ऐसी अधातु है जो द्रव अवस्था में पाई जाती है।
इस अध्याय में हम धातुओं एवं अधातुओं के भौतिक गुणधर्म, रासायनिक गुण (ऑक्सीजन, जल तथा अम्लों से अभिक्रिया), धातुओं की सक्रियता श्रेणी, आयनिक यौगिकों का निर्माण एवं उनके गुण, धातुओं का निष्कर्षण (धातु विज्ञान), संक्षारण तथा मिश्रधातुओं का विस्तृत अध्ययन करेंगे। इन अवधारणाओं को समझकर हम धातुओं के दैनिक जीवन में उपयोग, उनकी प्राप्ति तथा उनके संरक्षण की विधियों को भली-भाँति समझ सकेंगे और परीक्षा के प्रश्नों को सरलता से हल कर सकेंगे।
2. धातुओं एवं अधातुओं के भौतिक गुणधर्म
धातुओं के भौतिक गुण
धात्विक चमक: शुद्ध अवस्था में धातुओं की सतह चमकदार होती है, जैसे सोना और चाँदी।
कठोरता: धातुएँ सामान्यतः कठोर होती हैं, परंतु सोडियम, पोटेशियम तथा लिथियम इतने मुलायम होते हैं कि इन्हें चाकू से काटा जा सकता है।
आघातवर्ध्यता: धातुओं को पीटकर पतली चादर में बदला जा सकता है; सोना सबसे अधिक आघातवर्ध्य धातु है।
तन्यता: धातुओं को पतले तार के रूप में खींचा जा सकता है; एक ग्राम सोने से 2 किलोमीटर लंबा तार बनाया जा सकता है।
सुचालकता: धातुएँ ऊष्मा और विद्युत की अच्छी सुचालक होती हैं; सिल्वर और कॉपर सर्वोत्तम सुचालक हैं।
उच्च गलनांक एवं क्वथनांक: धातुओं के गलनांक और क्वथनांक ऊँचे होते हैं, यद्यपि गैलियम और सीजियम हथेली पर रखने से पिघल जाते हैं।
ध्वानिक गुण: धातुएँ कठोर सतह से टकराने पर ध्वनि उत्पन्न करती हैं।
अधातुओं के भौतिक गुण
अवस्था: अधातुएँ सामान्यतः ठोस या गैस अवस्था में होती हैं; ब्रोमीन एकमात्र द्रव अधातु है।
चमक: अधातुओं में चमक नहीं होती, परंतु आयोडीन चमकीला होता है।
कठोरता: अधातुएँ मुलायम होती हैं, परंतु हीरा (कार्बन का अपररूप) सबसे कठोर प्राकृतिक पदार्थ है।
कुचालकता: अधातुएँ ऊष्मा और विद्युत की कुचालक होती हैं, परंतु ग्रेफाइट (कार्बन का अपररूप) विद्युत का सुचालक है।
3. धातुओं के रासायनिक गुणधर्म
(क) ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया
धातुएँ ऑक्सीजन से अभिक्रिया करके क्षारीय धात्विक ऑक्साइड बनाती हैं।
कुछ धात्विक ऑक्साइड जैसे Al₂O₃ और ZnO उभयधर्मी होते हैं, अर्थात् ये अम्ल और क्षारक दोनों से क्रिया करके लवण और जल बनाते हैं। सोडियम और पोटेशियम इतने क्रियाशील हैं कि खुले में आग पकड़ लेते हैं, इसलिए इन्हें केरोसिन तेल में डुबोकर रखा जाता है। मैग्नीशियम, एल्युमिनियम, जिंक तथा लेड पर ऑक्साइड की पतली परत चढ़ जाती है जो आगे के ऑक्सीकरण से बचाती है। सोना और चाँदी उच्च ताप पर भी ऑक्सीजन से क्रिया नहीं करते।
(ख) जल के साथ अभिक्रिया
धातुएँ जल से क्रिया करके धातु ऑक्साइड या हाइड्रॉक्साइड तथा हाइड्रोजन गैस बनाती हैं। सोडियम, पोटेशियम और कैल्सियम ठंडे जल से तेजी से क्रिया करते हैं। कैल्सियम जल पर तैरने लगता है क्योंकि हाइड्रोजन के बुलबुले उसकी सतह पर चिपक जाते हैं। मैग्नीशियम गर्म जल से क्रिया करता है। एल्युमिनियम, लोहा तथा जिंक केवल भाप के साथ क्रिया करते हैं:
$3Fe + 4H_2O \rightarrow Fe_3O_4 + 4H_2$
लेड, कॉपर, सिल्वर तथा सोना जल से बिल्कुल अभिक्रिया नहीं करते।
(ग) अम्लों के साथ अभिक्रिया
धातु + तनु अम्ल → लवण + हाइड्रोजन गैस
$Zn + 2HCl \rightarrow ZnCl_2 + H_2 \uparrow$
जब धातुएँ नाइट्रिक अम्ल (HNO₃) से अभिक्रिया करती हैं तो हाइड्रोजन गैस उत्सर्जित नहीं होती, क्योंकि HNO₃ एक प्रबल ऑक्सीकारक है जो हाइड्रोजन को ऑक्सीकृत करके जल बना देता है। एक्वा रेजिया सांद्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (3 भाग) और सांद्र नाइट्रिक अम्ल (1 भाग) का ताजा मिश्रण है, जो सोने और प्लेटिनम को भी गला सकता है।
(घ) विस्थापन अभिक्रिया एवं सक्रियता श्रेणी
अधिक क्रियाशील धातु कम क्रियाशील धातु को उसके लवण विलयन से विस्थापित कर देती है। धातुओं को उनकी क्रियाशीलता के घटते क्रम में रखने पर प्राप्त सूची को सक्रियता श्रेणी कहते हैं:
K > Na > Ca > Mg > Al > Zn > Fe > Pb > H > Cu > Hg > Ag > Au
4. आयनिक यौगिकों का निर्माण
धातुएँ अपने संयोजकता कोश से इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन (Cation) बनाती हैं तथा अधातुएँ इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणायन (Anion) बनाती हैं। सोडियम क्लोराइड के निर्माण में सोडियम एक इलेक्ट्रॉन त्यागकर Na⁺ बनाता है और क्लोरीन एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके Cl⁻ बनाता है। विपरीत आवेशित आयन वैद्युत आकर्षण बल द्वारा जुड़कर आयनिक यौगिक NaCl बनाते हैं।
आयनिक यौगिकों के गुणधर्म:
ये ठोस, कठोर तथा भंगुर होते हैं।
अंतर-आयनिक आकर्षण बल के कारण इनका गलनांक तथा क्वथनांक बहुत अधिक होता है।
ये जल में घुलनशील होते हैं, परंतु केरोसिन या पेट्रोल जैसे कार्बनिक विलायकों में अघुलनशील होते हैं।
ठोस अवस्था में ये विद्युत का चालन नहीं करते, परंतु जलीय विलयन या गलित अवस्था में सुचालक होते हैं।
5. धातुओं की प्राप्ति (धातु विज्ञान)
पृथ्वी की भूपर्पटी में धातुएँ खनिजों के रूप में पाई जाती हैं। वे खनिज जिनसे धातु लाभकारी रूप से निकाली जा सकती है, अयस्क कहलाते हैं। अयस्क में उपस्थित अशुद्धियों (मिट्टी, रेत) को गैंग कहते हैं।
धातु निष्कर्षण की विधियाँ:
अयस्क का समृद्धीकरण: अयस्क से गैंग को हटाना।
कम क्रियाशील धातुओं का निष्कर्षण: सिनेबार (HgS) को वायु में गर्म करके Hg प्राप्त किया जाता है। $2HgS + 3O_2 \rightarrow 2HgO + 2SO_2$; फिर $2HgO \rightarrow 2Hg + O_2$।
मध्यम क्रियाशील धातुओं का निष्कर्षण: सल्फाइड अयस्क को वायु की उपस्थिति में गर्म करना भर्जन कहलाता है; कार्बोनेट अयस्क को सीमित वायु में गर्म करना निस्तापन कहलाता है। तत्पश्चात् कार्बन द्वारा अपचयन करके शुद्ध धातु प्राप्त की जाती है।
उच्च क्रियाशील धातुओं का निष्कर्षण: सोडियम, कैल्सियम और एल्युमिनियम जैसी धातुओं को कार्बन द्वारा अपचयित नहीं किया जा सकता, इसलिए इन्हें गलित क्लोराइड या ऑक्साइड के विद्युत अपघटन द्वारा प्राप्त किया जाता है। कैथोड पर धातु तथा एनोड पर गैस मुक्त होती है।
परिष्करण: अशुद्ध धातु को शुद्ध करने के लिए विद्युत अपघटनी परिष्करण का उपयोग होता है, जिसमें अशुद्ध ताँबा एनोड तथा शुद्ध ताँबे की पट्टी कैथोड होती है।
6. संक्षारण एवं मिश्रधातु
संक्षारण: हवा और नमी के कारण धातुओं का क्षय होना संक्षारण कहलाता है। लोहे पर भूरी जंग, चाँदी पर काली परत (Ag₂S) तथा ताँबे पर हरी परत (CuCO₃) संक्षारण के उदाहरण हैं। लोहे को जंग से बचाने के लिए उस पर जिंक की परत चढ़ाना यशदलेपन (गैल्वेनाइजेशन) कहलाता है।
मिश्रधातु: दो या दो से अधिक धातुओं (या धातु और अधातु) के समांगी मिश्रण को मिश्रधातु कहते हैं। मिश्रधातु बनाने से धातु के गुण बदल जाते हैं, जैसे जंग न लगना तथा कठोरता बढ़ना। पीतल (ताँबा + जिंक), कांसा (ताँबा + टिन), सोल्डर (लेड + टिन, कम गलनांक) तथा स्टेनलेस स्टील (लोहा + निकेल + क्रोमियम) महत्वपूर्ण मिश्रधातुएँ हैं। यदि मिश्रधातु में एक धातु पारा हो तो उसे अमलगम कहते हैं।
त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ
तालिका 1: धातु एवं अधातु की तुलना
गुण
धातु
अधातु
चमक
चमकदार
चमक रहित (आयोडीन अपवाद)
कठोरता
कठोर
मुलायम (हीरा अपवाद)
आघातवर्ध्यता
आघातवर्ध्य
भंगुर
विद्युत चालकता
सुचालक
कुचालक (ग्रेफाइट अपवाद)
अवस्था
ठोस (पारा द्रव)
ठोस/गैस (ब्रोमीन द्रव)
तालिका 2: महत्वपूर्ण मिश्रधातु
मिश्रधातु
घटक धातुएँ
विशेष उपयोग
पीतल
ताँबा + जिंक
बर्तन, सजावटी वस्तुएँ
कांसा
ताँबा + टिन
मूर्तियाँ, पदक
सोल्डर
लेड + टिन
वेल्डिंग (कम गलनांक)
स्टेनलेस स्टील
लोहा + निकेल + क्रोमियम
बर्तन, शल्य उपकरण
माइंड मैप
graph TD
A["धातु एवं अधातु"] --> B["धातु"]
A --> C["अधातु"]
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B3 --> B3c["कम क्रियाशील - गर्म करना"]
B5 --> B5a["पीतल, कांसा, सोल्डर, स्टेनलेस स्टील"]
महत्वपूर्ण आरेख (SVG)
आरेख 1: सक्रियता श्रेणी
आरेख 2: आयनिक यौगिक का निर्माण
सामान्य गलतियाँ
छात्र ब्रोमीन को द्रव धातु लिख देते हैं; वास्तव में पारा द्रव धातु है जबकि ब्रोमीन द्रव अधातु है।
सभी धातुओं को ठोस मान लिया जाता है, परंतु पारा कमरे के ताप पर द्रव होता है।
नाइट्रिक अम्ल से अभिक्रिया में हाइड्रोजन गैस निकलती है यह मान लिया जाता है, जबकि HNO₃ प्रबल ऑक्सीकारक होने से H₂ को जल में बदल देता है।
अधातुओं की सभी कुचालक नहीं होतीं; ग्रेफाइट विद्युत का सुचालक है।
उच्च क्रियाशील धातुओं को कार्बन द्वारा अपचयित किया जा सकता है यह गलत है; इन्हें विद्युत अपघटन की आवश्यकता होती है।
भर्जन और निस्तापन में भेद नहीं कर पाते - भर्जन सल्फाइड अयस्क को वायु की उपस्थिति में तथा निस्तापन कार्बोनेट अयस्क को सीमित वायु में गर्म करना है।
सोडियम और पोटेशियम को खुले में रखना सुरक्षित मान लिया जाता है, जबकि ये केरोसिन में रखे जाते हैं क्योंकि वायु में आग पकड़ लेते हैं।
परीक्षा युक्तियाँ
धातु एवं अधातु की तुलना करते समय अपवादों (पारा, ब्रोमीन, हीरा, ग्रेफाइट) का उल्लेख अवश्य करें।
सक्रियता श्रेणी (K से Au तक) याद रखें और विस्थापन अभिक्रिया लिखते समय श्रेणी का उपयोग करें।
धातु निष्कर्षण की तीन विधियों (विद्युत अपघटन, अपचयन, गर्म करना) को क्रियाशीलता से संबद्ध करके समझें।
आयनिक यौगिक के चार गुण (ठोस, उच्च गलनांक, जल में घुलनशील, गलित अवस्था में सुचालक) लिखने का अभ्यास करें।
मिश्रधातुओं के घटक तत्व और उपयोग रटें, विशेषकर स्टेनलेस स्टील एवं सोल्डर।
संक्षारण के तीन उदाहरण (लोहा-जंग, चाँदी-काली परत, ताँबा-हरी परत) तथा यशदलेपन की परिभाषा लिखें।
एक्वा रेजिया के अवयव (3 भाग HCl + 1 भाग HNO₃) याद रखें।
जल से क्रिया के उदाहरणों (ठंडा जल, गर्म जल, भाप) को अलग-अलग क्रम में याद रखें।
निष्कर्ष
धातु एवं अधातु तत्वों के दो महत्वपूर्ण वर्ग हैं जिनके गुणधर्म विपरीत होते हैं। धातुएँ चमकदार, आघातवर्ध्य, तन्य तथा सुचालक होती हैं जबकि अधातुएँ मुलायम एवं कुचालक होती हैं। धातुओं की सक्रियता श्रेणी उनकी क्रियाशीलता के क्रम को दर्शाती है, जिसके आधार पर विस्थापन अभिक्रियाएँ तथा धातु निष्कर्षण की विधियाँ निर्धारित होती हैं। धातुओं के निष्कर्षण के लिए समृद्धीकरण, भर्जन, निस्तापन, अपचयन तथा विद्युत अपघटन जैसी विधियाँ प्रयुक्त होती हैं। संक्षारण से धातुओं का क्षय होता है, जिसे यशदलेपन द्वारा रोका जाता है, जबकि मिश्रधातुएँ धातुओं के गुणों को सुधारती हैं। धातुओं के ज्ञान के बिना आधुनिक उद्योग एवं निर्माण कार्य असंभव है।