हमारे दैनिक जीवन में अनेक पदार्थ अम्लीय, क्षारकीय या उदासीन प्रकृति के होते हैं। नींबू और इमली का खट्टा स्वाद अम्ल के कारण होता है, जबकि साबुन का फिसलनापन तथा करेले की कड़वाहट क्षारकीय प्रकृति को दर्शाती है। रासायनिक दृष्टि से अम्ल वे पदार्थ हैं जो जलीय विलयन में हाइड्रोजन आयन (H⁺) प्रदान करते हैं और क्षारक वे पदार्थ हैं जो हाइड्रॉक्साइड आयन (OH⁻) प्रदान करते हैं। अम्ल और क्षारक जब परस्पर अभिक्रिया करते हैं तो लवण और जल का निर्माण होता है, इस प्रक्रिया को उदासीनीकरण कहते हैं। लवण हमारे जीवन का अभिन्न अंग हैं; साधारण नमक, बेकिंग सोडा, धोने का सोडा, विरंजक चूर्ण तथा प्लास्टर ऑफ पेरिस सभी महत्वपूर्ण लवण हैं।
इस अध्याय में हम अम्ल और क्षारक की परिभाषा, उनके भौतिक एवं रासायनिक गुण, सूचकों के प्रकार, उदासीनीकरण अभिक्रिया, pH स्केल तथा pH का दैनिक जीवन में महत्व, और महत्वपूर्ण लवणों (सोडियम हाइड्रॉक्साइड, विरंजक चूर्ण, बेकिंग सोडा, धोने का सोडा, प्लास्टर ऑफ पेरिस) के विस्तार से अध्ययन करेंगे। इन अवधारणाओं की सहायता से हम अपने आस-पास के रासायनिक पदार्थों की प्रकृति को समझ पाएँगे तथा परीक्षा में पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण प्रश्नों को हल कर सकेंगे।
अम्ल: वे पदार्थ जो स्वाद में खट्टे होते हैं तथा नीले लिटमस पत्र को लाल कर देते हैं, अम्ल कहलाते हैं। आर्हीनियस के सिद्धांत के अनुसार अम्ल वे पदार्थ हैं जो जलीय विलयन में हाइड्रोजन आयन (H⁺) देते हैं। अम्ल दो प्रकार के होते हैं - प्राकृतिक (कार्बनिक) अम्ल, जैसे नींबू में सिट्रिक अम्ल, दही में लैक्टिक अम्ल, चींटी के डंक में मेथेनॉइक अम्ल; तथा खनिज (अकार्बनिक) अम्ल, जैसे HCl, H₂SO₄, HNO₃। अम्लों का pH मान 7 से कम होता है तथा ये जलीय विलयन में विद्युत का चालन करते हैं।
क्षारक: वे पदार्थ जो स्वाद में कड़वे होते हैं, स्पर्श में साबुन जैसे लगते हैं तथा लाल लिटमस को नीला कर देते हैं, क्षारक कहलाते हैं। क्षारक जलीय विलयन में हाइड्रॉक्साइड आयन (OH⁻) देते हैं तथा इनका pH मान 7 से अधिक होता है। जल में घुलनशील क्षारक को क्षार (Alkali) कहते हैं, जैसे NaOH और KOH। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि सभी क्षार क्षारक होते हैं, परंतु सभी क्षारक क्षार नहीं होते।
सूचक वे पदार्थ हैं जो अपने रंग या गंध में परिवर्तन द्वारा यह बताते हैं कि दिया गया पदार्थ अम्ल है या क्षारक। सूचक मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं:
अम्ल धातुओं से अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस तथा लवण बनाते हैं। हाइड्रोजन गैस की पहचान पॉप टेस्ट से होती है, जिसमें जलती हुई मोमबत्ती गैस के पास ले जाने पर पॉप की ध्वनि उत्पन्न होती है।
$Zn + 2HCl \rightarrow ZnCl_2 + H_2 \uparrow$
क्षारक भी कुछ धातुओं (जैसे जिंक, एल्युमिनियम) से क्रिया करके हाइड्रोजन देते हैं:
$2NaOH + Zn \rightarrow Na_2ZnO_2 + H_2 \uparrow$
अम्ल धातु कार्बोनेटों से अभिक्रिया करके लवण, जल और कार्बन डाइऑक्साइड गैस बनाते हैं। CO₂ गैस को चूने के पानी से गुजारने पर वह दूधिया हो जाता है, जो CaCO₃ बनने के कारण होता है।
$Na_2CO_3 + 2HCl \rightarrow 2NaCl + H_2O + CO_2 \uparrow$
जब अम्ल और क्षारक आपस में अभिक्रिया करते हैं तो वे एक-दूसरे के प्रभाव को नष्ट कर देते हैं तथा लवण और जल का निर्माण करते हैं। इस प्रक्रिया को उदासीनीकरण कहते हैं।
$NaOH + HCl \rightarrow NaCl + H_2O$
धात्विक ऑक्साइड (जैसे CuO, MgO) क्षारीय प्रकृति के होते हैं तथा अम्ल से क्रिया करके लवण और जल बनाते हैं। अधात्विक ऑक्साइड (जैसे CO₂, SO₂) अम्लीय प्रकृति के होते हैं तथा क्षारक से क्रिया करके लवण और जल बनाते हैं। अम्ल वर्षा में घुली CO₂ और SO₂ के कारण ही वर्षा का जल अम्लीय हो जाता है।
किसी विलयन में हाइड्रोजन आयन की सांद्रता ज्ञात करने के लिए pH स्केल का उपयोग होता है। pH का पूर्ण रूप 'पोटेंशियल हाइड्रोजन' है। pH स्केल की परास 0 से 14 होती है। pH 7 उदासीन विलयन (शुद्ध जल) के लिए होता है; pH 7 से कम अम्लीय तथा pH 7 से अधिक क्षारीय विलयन को दर्शाता है। pH का मान जितना कम होगा, अम्ल उतना ही प्रबल होगा।
दैनिक जीवन में pH का महत्व:
नमक के जलीय विलयन (ब्राइन) से विद्युत धारा प्रवाहित करने पर:
$2NaCl(aq) + 2H_2O(l) \rightarrow 2NaOH(aq) + Cl_2(g) + H_2(g)$
Cl₂ का उपयोग जल की स्वच्छता में, H₂ का ईंधन के रूप में तथा NaOH का साबुन और कागज बनाने में होता है।
शुष्क बुझे हुए चूने पर क्लोरीन गैस की क्रिया से बनता है: $Ca(OH)_2 + Cl_2 \rightarrow CaOCl_2 + H_2O$। इसका उपयोग वस्त्रों के विरंजन तथा पीने के पानी को जीवाणु-मुक्त करने में होता है।
सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट को बेकिंग सोडा कहते हैं। इसे बेकिंग पाउडर (बेकिंग सोडा + टार्टरिक अम्ल) बनाने, एंटासिड के रूप में तथा अग्निशामक में उपयोग किया जाता है। गर्म करने पर यह Na₂CO₃, जल और CO₂ देता है; CO₂ के कारण ही ब्रेड और केक फूलते हैं।
सोडियम कार्बोनेट डेकाहाइड्रेट को धोने का सोडा कहते हैं। इसका उपयोग काँच, साबुन, कागज उद्योग में तथा जल की स्थायी कठोरता दूर करने में होता है।
जिप्सम (CaSO₄·2H₂O) को 373 K पर गर्म करने पर प्लास्टर ऑफ पेरिस बनता है। इसका उपयोग टूटी हुई हड्डियों को स्थिर करने, खिलौने बनाने तथा सतह को चिकना बनाने में होता है। POP को नमी-रोधी बर्तन में रखना चाहिए, क्योंकि नमी के संपर्क में यह पुनः कठोर जिप्सम बन जाता है।
| गुण | अम्ल | क्षारक |
|---|---|---|
| स्वाद | खट्टा | कड़वा |
| लिटमस | नीला → लाल | लाल → नीला |
| आयन | H⁺ | OH⁻ |
| pH मान | < 7 | > 7 |
| उदाहरण | HCl, H₂SO₄ | NaOH, KOH |
| लवण | सूत्र | उपयोग |
|---|---|---|
| सोडियम हाइड्रॉक्साइड | NaOH | साबुन, कागज |
| विरंजक चूर्ण | CaOCl₂ | विरंजन, जल शुद्धीकरण |
| बेकिंग सोडा | NaHCO₃ | बेकिंग पाउडर, एंटासिड |
| धोने का सोडा | Na₂CO₃·10H₂O | काँच, कठोर जल |
| प्लास्टर ऑफ पेरिस | CaSO₄·½H₂O | हड्डियाँ, खिलौने |
अम्ल, क्षारक एवं लवण हमारे दैनिक जीवन के अभिन्न अंग हैं। अम्ल खट्टे होते हैं तथा जलीय विलयन में H⁺ आयन देते हैं, जबकि क्षारक कड़वे होते हैं तथा OH⁻ आयन देते हैं। अम्ल और क्षारक की उदासीनीकरण अभिक्रिया से लवण और जल बनते हैं। pH स्केल किसी विलयन की अम्लीय, उदासीन या क्षारीय प्रकृति को दर्शाता है, जिसका महत्व मिट्टी, पाचन तंत्र तथा दंत स्वास्थ्य में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। सोडियम हाइड्रॉक्साइड, विरंजक चूर्ण, बेकिंग सोडा, धोने का सोडा तथा प्लास्टर ऑफ पेरिस जैसे लवण उद्योग एवं घरेलू जीवन में अत्यंत उपयोगी हैं। इन अवधारणाओं का ज्ञान हमें रासायनिक पदार्थों की प्रकृति को समझने तथा विज्ञान के प्रश्नों को हल करने में सहायता करता है।