हमारे चारों ओर घटित होने वाली लगभग हर घटना में पदार्थों में परिवर्तन होता रहता है। दूध का दही बनना, लोहे की कील पर जंग लगना, लकड़ी का जलकर राख बनना, फलों का पकना तथा श्वसन की क्रिया ये सभी ऐसे उदाहरण हैं जिनमें एक पदार्थ के बदलकर दूसरा पदार्थ बनता है। जब कोई पदार्थ परिवर्तित होकर नए पदार्थ का निर्माण करता है जिसके गुण मूल पदार्थ से सर्वथा भिन्न होते हैं, तो उस परिवर्तन को रासायनिक अभिक्रिया कहते हैं। रासायनिक अभिक्रिया पदार्थों की आन्तरिक संरचना में होने वाला परिवर्तन है, जिसमें परमाणुओं की व्यवस्था बदल जाती है, परंतु परमाणुओं की संख्या वही रहती है। यही कारण है कि रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान का संरक्षण होता है।
रासायनिक अभिक्रियाओं का अध्ययन रसायन विज्ञान का केन्द्रीय विषय है। अभिक्रिया को समझने के लिए हमें यह जानना आवश्यक है कि अभिक्रिया से पहले कौन-से पदार्थ भाग ले रहे हैं (अभिकारक) और अभिक्रिया के बाद कौन-से पदार्थ बन रहे हैं (उत्पाद)। रासायनिक अभिक्रियाओं को संक्षिप्त रूप में दर्शाने के लिए रासायनिक समीकरणों का प्रयोग होता है। रासायनिक समीकरण प्रतीकों और सूत्रों की भाषा में लिखा गया अभिक्रिया का संक्षिप्त विवरण है। द्रव्यमान संरक्षण के नियम के अनुसार समीकरण को संतुलित करना अनिवार्य है, अर्थात् अभिकारकों तथा उत्पादों में प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या समान होनी चाहिए। संतुलित समीकरण ही हमें अभिक्रिया की पूर्ण जानकारी देता है।
इस अध्याय में हम रासायनिक अभिक्रिया की पहचान, रासायनिक समीकरण लिखने एवं संतुलित करने की विधि, रासायनिक अभिक्रियाओं के विभिन्न प्रकार (संयोजन, वियोजन, विस्थापन, द्विविस्थापन, उपचयन एवं अपचयन), ऊष्मा के आधार पर अभिक्रियाओं के प्रकार तथा दैनिक जीवन में उपचयन अभिक्रियाओं के प्रभावों (संक्षारण एवं विकृतगंधिता) का विस्तार से अध्ययन करेंगे। इन अवधारणाओं को समझकर हम रासायनिक अभिक्रियाओं को वैज्ञानिक दृष्टि से समझ सकेंगे तथा परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों को सरलता से हल कर सकेंगे।
रासायनिक अभिक्रिया घटित हुई है या नहीं, यह हम निम्नलिखित प्रेक्षणों के आधार पर निर्धारित कर सकते हैं:
किसी रासायनिक अभिक्रिया को प्रतीकों और सूत्रों के माध्यम से दर्शाने की विधि को रासायनिक समीकरण कहते हैं। अभिक्रिया में भाग लेने वाले पदार्थ अभिकारक कहलाते हैं और उनके दाईं ओर तीर के सामने बनने वाले पदार्थ उत्पाद कहलाते हैं। उदाहरण के लिए मैग्नीशियम रिबन को ऑक्सीजन में जलाने पर:
मैग्नीशियम + ऑक्सीजन → मैग्नीशियम ऑक्साइड
$2Mg + O_2 \rightarrow 2MgO$
द्रव्यमान संरक्षण के नियम के अनुसार अभिक्रिया में द्रव्यमान का न तो सृजन होता है और न ही विनाश। अतः समीकरण के दोनों ओर प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या समान होनी चाहिए। संतुलित समीकरण को ही रासायनिक समीकरण कहते हैं।
उदाहरण के लिए असंतुलित समीकरण $Fe + H_2O \rightarrow Fe_3O_4 + H_2$ को संतुलित करने पर:
$3Fe + 4H_2O \rightarrow Fe_3O_4 + 4H_2$
समीकरण को संतुलित करते समय हम यौगिकों के सूत्र नहीं बदल सकते, केवल उनके आगे गुणांक (coefficients) लगा सकते हैं। इस विधि को प्रयास तथा त्रुटि विधि (Hit and Trial Method) कहते हैं।
जब दो या दो से अधिक अभिकारक मिलकर एकल उत्पाद बनाते हैं तो उसे संयोजन अभिक्रिया कहते हैं। इसका सामान्य रूप $A + B \rightarrow AB$ है।
जब एक एकल अभिकारक टूटकर दो या दो से अधिक सरल उत्पाद बनाता है तो उसे वियोजन अभिक्रिया कहते हैं। इसके लिए ऊष्मा, प्रकाश या विद्युत ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
जब अधिक क्रियाशील तत्व कम क्रियाशील तत्व को उसके यौगिक के विलयन से विस्थापित कर देता है तो उसे विस्थापन अभिक्रिया कहते हैं। सामान्य रूप $A + BC \rightarrow AC + B$ है।
$Fe(s) + CuSO_4(aq) \rightarrow FeSO_4(aq) + Cu(s)$
जब अभिकारकों के बीच आयनों का आदान-प्रदान होता है तो उसे द्विविस्थापन अभिक्रिया कहते हैं। अक्सर इसमें अविलेय पदार्थ (अवक्षेप) बनता है, जिसे अवक्षेपण अभिक्रिया भी कहते हैं।
$Na_2SO_4(aq) + BaCl_2(aq) \rightarrow BaSO_4(s)\downarrow + 2NaCl(aq)$
किसी पदार्थ में ऑक्सीजन की वृद्धि या हाइड्रोजन का ह्रास उपचयन है, जबकि ऑक्सीजन का ह्रास या हाइड्रोजन की वृद्धि अपचयन है। उपचयन और अपचयन दोनों साथ-साथ होते हैं, अतः उन्हें रेडॉक्स अभिक्रिया कहते हैं।
$CuO + H_2 \xrightarrow{ऊष्मा} Cu + H_2O$
यहाँ CuO का अपचयन होता है (ऑक्सीजन हटती है) तथा H₂ का उपचयन (ऑक्सीजन जुड़ती है)।
जिन अभिक्रियाओं में उत्पाद के साथ ऊष्मा भी निकलती है उन्हें ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया कहते हैं। उदाहरण के लिए प्राकृतिक गैस (मेथेन) का दहन: $CH_4(g) + 2O_2(g) \rightarrow CO_2(g) + 2H_2O(g) + ऊष्मा$। श्वसन भी एक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है क्योंकि ग्लूकोज ऑक्सीजन से क्रिया करके ऊर्जा प्रदान करता है। दूसरी ओर जिन अभिक्रियाओं में अभिकारकों को तोड़ने के लिए ऊष्मा, प्रकाश या विद्युत ऊर्जा अवशोषित होती है, उन्हें ऊष्माशोषी अभिक्रिया कहते हैं। सभी वियोजन अभिक्रियाएँ ऊष्माशोषी होती हैं।
जब कोई धातु अपने चारों ओर की नमी, अम्ल या वायु के संपर्क में आकर संक्षारित होने लगती है तो इस प्रक्रिया को संक्षारण कहते हैं। लोहे पर जंग लगना, चाँदी पर काली परत चढ़ना, तांबे पर हरी परत चढ़ना संक्षारण के उदाहरण हैं। संक्षारण को पेंट, तेल, ग्रीस तथा गैल्वेनाइजेशन (लोहे पर जिंक की परत) द्वारा रोका जा सकता है।
वसायुक्त एवं तैलीय खाद्य सामग्री लंबे समय तक रखने पर वायु के ऑक्सीजन से क्रिया करके उपचयित हो जाती है, जिससे उसका स्वाद और गंध बदल जाते हैं। इस प्रक्रिया को विकृतगंधिता कहते हैं। इसे रोकने के लिए प्रतिऑक्सीकारकों का उपयोग, वायुरोधी बर्तन तथा चिप्स की थैलियों में नाइट्रोजन गैस भरना अपनाया जाता है।
| प्रकार | परिभाषा | उदाहरण |
|---|---|---|
| संयोजन | दो या अधिक पदार्थ मिलकर एक उत्पाद | $C + O_2 \rightarrow CO_2$ |
| वियोजन | एक पदार्थ टूटकर कई उत्पाद | $CaCO_3 \rightarrow CaO + CO_2$ |
| विस्थापन | अधिक क्रियाशील तत्व का आदान-प्रदान | $Fe + CuSO_4 \rightarrow FeSO_4 + Cu$ |
| द्विविस्थापन | आयनों का आदान-प्रदान | $Na_2SO_4 + BaCl_2 \rightarrow BaSO_4 + 2NaCl$ |
| उपचयन | ऑक्सीजन वृद्धि / हाइड्रोजन ह्रास | $H_2 \rightarrow H_2O$ |
| प्रेक्षण | उदाहरण |
|---|---|
| अवस्था में परिवर्तन | मोम का जलना |
| रंग में परिवर्तन | लोहे पर जंग लगना |
| गैस का उत्सर्जन | जिंक + तनु H₂SO₄ → H₂ |
| तापमान में परिवर्तन | CaO + जल → ऊष्मा |
रासायनिक अभिक्रियाएँ पदार्थों के रासायनिक परिवर्तन को दर्शाती हैं, जिन्हें हम अवस्था, रंग, गैस तथा तापमान में परिवर्तन से पहचान सकते हैं। रासायनिक समीकरण को द्रव्यमान संरक्षण के नियम के अनुसार संतुलित करना अनिवार्य है। रासायनिक अभिक्रियाएँ मुख्यतः पाँच प्रकार की होती हैं - संयोजन, वियोजन, विस्थापन, द्विविस्थापन तथा रेडॉक्स (उपचयन-अपचयन)। वियोजन अभिक्रियाएँ ऊष्माशोषी जबकि दहन एवं श्वसन ऊष्माक्षेपी होती हैं। दैनिक जीवन में संक्षारण तथा विकृतगंधिता उपचयन अभिक्रियाओं के मुख्य प्रभाव हैं, जिन्हें उचित उपायों से रोका जा सकता है। रासायनिक अभिक्रियाओं का ज्ञान हमें दैनिक जीवन की अनेक घटनाओं को वैज्ञानिक दृष्टि से समझने में सहायता करता है।