प्रकाश ऊर्जा का वह रूप है जो हमारी आँखों को देखने की संवेदना प्रदान करता है। प्रकाश सदैव सीधी रेखा में गमन करता है, जिसे प्रकाश की किरण कहते हैं। निर्वात में प्रकाश की चाल सर्वाधिक होती है, जो $3 \times 10^8$ मीटर प्रति सेकंड (लगभग 3 लाख किलोमीटर प्रति सेकंड) है। प्रकाश एक विद्युत चुंबकीय तरंग है जिसे संचरण के लिए किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती। प्रकाश के गुणधर्मों का अध्ययन प्रकाशिकी कहलाता है। जब प्रकाश किसी सतह से टकराता है तो वह परावर्तित या अपवर्तित हो सकता है।
जब प्रकाश की किरण किसी चमकदार सतह (जैसे दर्पण) से टकराकर उसी माध्यम में वापस लौटती है तो इसे परावर्तन कहते हैं, जबकि जब प्रकाश एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे माध्यम में तिरछी प्रवेश करने पर मुड़ जाता है तो इसे अपवर्तन कहते हैं। परावर्तन तथा अपवर्तन दोनों ही घटनाओं में प्रकाश की चाल एवं दिशा में परिवर्तन होता है। इस अध्याय में हम परावर्तन के नियम, गोलीय दर्पण, दर्पण सूत्र, अपवर्तन के नियम, अपवर्तनांक, गोलीय लेंस, लेंस सूत्र तथा लेंस की क्षमता का विस्तार से अध्ययन करेंगे।
जब प्रकाश की किरण किसी पॉलिश की हुई चमकदार सतह पर गिरती है तो उसका अधिकांश भाग उसी माध्यम में वापस लौट आता है। इस घटना को प्रकाश का परावर्तन कहते हैं। परावर्तन के दो नियम हैं:
वे दर्पण जिनका परावर्तक पृष्ठ किसी खोखले गोले का भाग होता है, गोलीय दर्पण कहलाते हैं। गोलीय दर्पण दो प्रकार के होते हैं:
गोलीय दर्पण से संबंधित पद: ध्रुव (P) दर्पण के परावर्तक पृष्ठ का केंद्र है; वक्रता केंद्र (C) गोले का केंद्र है; मुख्य अक्ष ध्रुव तथा वक्रता केंद्र से गुजरने वाली काल्पनिक रेखा है; मुख्य फोकस (F) वह बिंदु है जहाँ मुख्य अक्ष के समांतर किरणें परावर्तन के बाद मिलती हैं या मिलती हुई प्रतीत होती हैं; फोकस दूरी (f) ध्रुव तथा फोकस के बीच की दूरी है। वक्रता त्रिज्या (R) तथा फोकस दूरी (f) में संबंध है:
$R = 2f$
उपयोग: अवतल दर्पण का उपयोग टॉर्च, सर्चलाइट, हेडलाइट, शेविंग दर्पण, डेंटिस्ट के दर्पण तथा सौर भट्टियों में होता है। उत्तल दर्पण का उपयोग वाहनों के रियरव्यू मिरर के रूप में होता है, क्योंकि यह सदैव सीधा एवं छोटा प्रतिबिंब बनाकर विस्तृत दृष्टि क्षेत्र प्रदान करता है।
दर्पण सूत्र प्रतिबिंब दूरी (v), बिंब दूरी (u) तथा फोकस दूरी (f) में संबंध बताता है:
$\frac{1}{v} + \frac{1}{u} = \frac{1}{f}$
आवर्धन (m) प्रतिबिंब की ऊँचाई (h') तथा बिंब की ऊँचाई (h) का अनुपात है:
$m = \frac{h'}{h} = -\frac{v}{u}$
यदि m ऋणात्मक है तो प्रतिबिंब वास्तविक तथा उल्टा है; यदि m धनात्मक है तो प्रतिबिंब आभासी तथा सीधा है।
जब प्रकाश की किरण एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे पारदर्शी माध्यम (जैसे हवा से पानी या काँच) में तिरछी प्रवेश करती है तो वह अपने मूल पथ से मुड़ जाती है। दिशा में इस परिवर्तन को प्रकाश का अपवर्तन कहते हैं। अपवर्तन का कारण विभिन्न माध्यमों में प्रकाश की चाल का भिन्न होना है। विरल माध्यम से सघन माध्यम में प्रवेश करने पर प्रकाश अभिलंब की ओर झुकता है।
अपवर्तन के नियम:
$\frac{\sin i}{\sin r} = n$
यहाँ n माध्यम का अपवर्तनांक है। अपवर्तनांक यह बताता है कि किसी माध्यम में प्रकाश की चाल निर्वात या वायु की तुलना में कितनी कम है। वायु का अपवर्तनांक लगभग 1 होता है, जल का लगभग 1.33 तथा हीरे का अपवर्तनांक सर्वाधिक 2.42 होता है, अर्थात् हीरे में प्रकाश की चाल सबसे कम होती है।
लेंस एक पारदर्शी पदार्थ (जैसे काँच) है जो दो पृष्ठों से घिरा होता है, जिनमें से कम से कम एक पृष्ठ गोलीय होता है। गोलीय लेंस दो प्रकार के होते हैं:
लेंस सूत्र:
$\frac{1}{v} - \frac{1}{u} = \frac{1}{f}$
लेंस का आवर्धन:
$m = \frac{h'}{h} = \frac{v}{u}$
किसी लेंस द्वारा प्रकाश किरणों को अभिसरण या अपसरण करने की मात्रा को उसकी क्षमता कहते हैं। क्षमता फोकस दूरी (मीटर में) के व्युत्क्रम के बराबर होती है:
$P = \frac{1}{f}$
लेंस की क्षमता का SI मात्रक डायोप्टर (D) है। 1 डायोप्टर उस लेंस की क्षमता है जिसकी फोकस दूरी 1 मीटर होती है। उत्तल लेंस की क्षमता धनात्मक तथा अवतल लेंस की क्षमता ऋणात्मक होती है।
| विशेषता | अवतल दर्पण | उत्तल दर्पण | उत्तल लेंस | अवतल लेंस |
|---|---|---|---|---|
| सतह | अंदर वक्रित | बाहर उभरी | बीच मोटा | बीच पतला |
| प्रकृति | अभिसारी | अपसारी | अभिसारी | अपसारी |
| प्रतिबिंब | वास्तविक/आभासी | सदैव आभासी | वास्तविक/आभासी | सदैव आभासी |
| क्षमता | - | - | धनात्मक | ऋणात्मक |
| राशि | सूत्र | SI मात्रक |
|---|---|---|
| दर्पण सूत्र | $\frac{1}{v} + \frac{1}{u} = \frac{1}{f}$ | मीटर |
| लेंस सूत्र | $\frac{1}{v} - \frac{1}{u} = \frac{1}{f}$ | मीटर |
| आवर्धन | $m = \frac{h'}{h}$ | मात्रक रहित |
| क्षमता | $P = \frac{1}{f}$ | डायोप्टर |
प्रकाश ऊर्जा का एक रूप है जो सीधी रेखा में चलता है। परावर्तन में प्रकाश किरण चमकदार सतह से टकराकर वापस लौटती है, जिसमें आपतन कोण परावर्तन कोण के बराबर होता है। गोलीय दर्पण (अवतल एवं उत्तल) तथा गोलीय लेंस (उत्तल एवं अवतल) प्रकाश को अभिसरित या अपसारित करते हैं। दर्पण सूत्र तथा लेंस सूत्र प्रतिबिंब की स्थिति ज्ञात करने में सहायक हैं। अपवर्तन में प्रकाश एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाते समय मुड़ता है, और स्नेल का नियम इसकी व्याख्या करता है। लेंस की क्षमता फोकस दूरी के व्युत्क्रम के बराबर होती है, जिसका मात्रक डायोप्टर है। प्रकाश के परावर्तन एवं अपवर्तन का ज्ञान दर्पणों, लेंसों, कैमरों, चश्मों तथा दूरबीनों जैसे असंख्य उपकरणों के सिद्धांतों को समझने के लिए आधारभूत है।