Comprehensive theory, key formulas, diagrams, and memory aids for एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा! - रामविलास शर्मा.
'एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा!' रामविलास शर्मा द्वारा रचित एक गीतिनाट्य है, जो माँ के प्रति प्रवासी पुत्र की गहरी विरह-व्यथा को प्रस्तुत करता है। शीर्षक का अर्थ है - 'हे राम! इसी जगह झूला खो गया।' 'झुलनी' (झूला) यहाँ माँ के स्नेह और बचपन की यादों का प्रतीक है। रचना में एक शहर में काम करने वाला बेटा अपनी गाँव की माँ और बचपन को याद करता है।
यह रचना प्रवासी मज़दूरों की पीड़ा, मातृ-स्नेह की अमरता और गाँव-शहर के जीवन के अंतर को सजीव रूप में चित्रित करती है। माँ की झुलनी में बीता बचपन, उसकी गोद की गरमाहट और विरह की वेदना इस गीतिनाट्य के केंद्रीय भाव हैं।
रामविलास शर्मा का जन्म सन् 1912 ई. में उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में हुआ। वे प्रसिद्ध साहित्यकार, आलोचक और भाषावैज्ञानिक थे।
रचना का केंद्रीय पात्र एक युवक है, जो रोजी-रोटी की तलाश में गाँव छोड़कर शहर आया है। वह शहर के व्यस्त जीवन में काम करता है, परंतु उसका मन अपने गाँव और माँ की ओर आकर्षित रहता है। उसे अपना बचपन याद आता है।
पुत्र को माँ की वह झुलनी (झूला) याद आती है, जिसमें माँ उसे झुलाती थी। 'एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा' का भाव है कि माँ का वह स्नेह-भरा संसार खो गया है। शहर के जीवन में वह माँ की गोद की वह शांति नहीं पा सकता।
पुत्र की आँखों में माँ की याद के आँसू होते हैं। वह माँ के बिना अधूरा महसूस करता है। शहर के लोग उसे समझ नहीं पाते। वह चाहता है कि एक बार फिर माँ की गोद में सिर रखकर सो सके।
रचना का अंत इस भाव के साथ होता है कि माँ का प्रेम संसार की सबसे बड़ी संपत्ति है। चाहे कितनी भी दूरी हो, माँ की याद और उसका स्नेह हर पल पुत्र के साथ रहता है। झुलनी खो जाने पर भी माँ का प्रेम अमर रहता है।
रचना का मूल भाव मातृ-प्रेम की अमरता और प्रवासी जीवन की पीड़ा है। 'झुलनी' माँ के स्नेह और बचपन की मासूमियत का प्रतीक है। संदेश यह है कि माँ का प्रेम संसार की सबसे बड़ी शक्ति है, जो दूरी और समय से प्रभावित नहीं होता।
| क्रम | विषय | विवरण |
|---|---|---|
| 1 | लेखक | रामविलास शर्मा |
| 2 | विधा | गीतिनाट्य |
| 3 | मुख्य भाव | मातृ-प्रेम और विरह |
| 4 | प्रतीक | झुलनी |
| 5 | रस | करुण, वात्सल्य |
| तत्व | भाव |
|---|---|
| झुलनी | माँ का स्नेह |
| गाँव | बचपन और शांति |
| शहर | प्रवासी जीवन की पीड़ा |
| माँ की गोद | सुरक्षा और प्रेम |
graph TD
A["एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा!"] --> B["लेखक: रामविलास शर्मा"]
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A --> D["प्रवासी पुत्र"]
A --> E["माँ की याद"]
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D --> G["शहर का जीवन"]
E --> H["बचपन की स्मृतियाँ"]
F --> I["मातृ-स्नेह"]
A --> J["संदेश: माँ का प्रेम अमर है"]
'एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा!' रामविलास शर्मा का गीतिनाट्य है, जो प्रवासी पुत्र की मातृ-विरह व्यथा और माँ के स्नेह की अमरता को प्रस्तुत करता है। 'झुलनी' माँ के प्रेम का प्रतीक है, जो दूरी और समय से परे रहता है। यह रचना मातृ-प्रेम की पवित्रता और बचपन की स्मृतियों की मधुरता का अमर संदेश देती है।