Comprehensive theory, key formulas, diagrams, and memory aids for कारतूस - हबीब तनवीर.
'कारतूस' हबीब तनवीर द्वारा रचित एकांकी है, जो अंग्रेज़ शासन के समय एक गाँव की कहानी प्रस्तुत करती है। गाँव का नाम रामनगर है, जहाँ अंग्रेज़ सैन्य अधिकारी (कर्नल) कारतूस के एक डिब्बे की खोज में आता है। ग्रामीण अपनी सूझ-बूझ और सामूहिक चेतना से उसे गुमराह करते हैं और कारतूस हाथ नहीं लगने देते।
यह एकांकी उपनिवेशवाद के विरोध और ग्रामीणों की बुद्धि-कौशल का सजीव चित्रण है। अंग्रेज़ कर्नल की जिद्द और ग्रामीणों की निर्दोष मासूमियत के बीच का संघर्ष नाटकीय रोचकता उत्पन्न करता है। अंत में ग्रामीणों की एकता और चतुराई से कर्नल को खाली हाथ लौटना पड़ता है।
हबीब तनवीर का जन्म सन् 1923 ई. में छत्तीसगढ़ के रायपुर में हुआ। वे प्रसिद्ध नाटककार, निर्देशक और रंगकर्मी थे, जिन्होंने भारतीय रंगमंच को नई दिशा दी।
एकांकी का कथानक रामनगर गाँव में घटित होता है। वहाँ अंग्रेज़ सैनिक टुकड़ी का एक कारतूस का डिब्बा खो गया है। अंग्रेज़ कर्नल उस डिब्बे की तलाश में गाँव में पहुँचता है। उसे लगता है कि ग्रामीणों के पास ही वह डिब्बा है।
कर्नल अपने साथ अनुवादक (सूबेदार) को लेकर गाँव वालों से पूछताछ करता है। ग्रामीण बड़ी चतुराई से कर्नल को भ्रमित करते हैं। वे सीधे-सादे और निर्दोष बनकर ऐसे उत्तर देते हैं कि कर्नल को कारतूस का कोई सुराग नहीं मिलता।
गाँव के लोग एक-दूसरे का साथ देते हैं। वे समझते हैं कि कारतूस का डिब्बा अंग्रेज़ों को नहीं देना चाहिए। उनकी सामूहिक चतुराई और निर्दोष-नाटकीयता के सामने कर्नल की सारी कोशिशें विफल हो जाती हैं।
अंत में कर्नल कारतूस न मिलने पर निराश होकर गाँव से चला जाता है। ग्रामीणों की एकता और बुद्धि-कौशल विजयी होती है। यह एकांकी उपनिवेशवादी सत्ता के विरुद्ध आम जनता के प्रतिरोध को प्रस्तुत करती है।
एकांकी का मूल भाव उपनिवेशवाद के विरुद्ध आम जनता का प्रतिरोध है। ग्रामीण अपनी सूझ-बूझ और सामूहिक एकता से अंग्रेज़ अधिकारी को छकाते हैं। संदेश यह है कि आम जनता की एकता और चतुराई किसी भी शोषक शक्ति को परास्त कर सकती है।
| क्रम | विषय | विवरण |
|---|---|---|
| 1 | लेखक | हबीब तनवीर |
| 2 | विधा | एकांकी |
| 3 | स्थान | रामनगर गाँव |
| 4 | मुख्य विषय | कारतूस की खोज |
| 5 | मूल भाव | उपनिवेशवाद विरोध |
| पात्र | भूमिका |
|---|---|
| कर्नल | शोषक अधिकारी |
| सूबेदार | अनुवादक |
| ग्रामीण | चतुर प्रतिरोधक |
| बालक | सूझ-बूझ का प्रतीक |
graph TD
A["कारतूस - हबीब तनवीर"] --> B["लेखक: रंगकर्मी"]
A --> C["रामनगर गाँव"]
A --> D["कर्नल की खोज"]
A --> E["ग्रामीणों की चतुराई"]
A --> F["उपनिवेशवाद विरोध"]
C --> G["कारतूस का डिब्बा"]
D --> H["पूछताछ"]
E --> I["सामूहिक एकता"]
F --> J["संदेश: एकता ही शक्ति"]
'कारतूस' हबीब तनवीर की महत्वपूर्ण एकांकी है, जो उपनिवेशवाद के विरुद्ध आम जनता के चतुर प्रतिरोध को प्रस्तुत करती है। ग्रामीणों की सामूहिक एकता और सूझ-बूझ के सामने अंग्रेज़ कर्नल को खाली हाथ लौटना पड़ता है। यह एकांकी सामाजिक चेतना और राष्ट्रीय भावना का सशक्त मंच है।