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'समास' संस्कृत भाषा का शब्द है जिसका शाब्दिक अर्थ है - संक्षिप्तीकरण (Shortening/Compounding)। यह हिंदी व्याकरण की एक महत्वपूर्ण विधा है जिसमें दो या दो से अधिक सार्थक शब्दों को विशेष नियमों के अनुसार जोड़कर एक नया, संक्षिप्त और सार्थक शब्द बनाया जाता है।
समास की प्रक्रिया को समझने के लिए कुछ मुख्य शब्दावली:
| हिंदी टर्म | अंग्रेजी टर्म | परिभाषा | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| समस्त पद | Compound Word | समास के नियमों से बना नया शब्द | राजपुत्र, गगनचुंबी |
| समास विग्रह | Resolution of Compound | समस्त पद को वापस अलग-अलग करके लिखना | राजा का पुत्र, गगन को चूमने वाला |
| पूर्वपद | First Term | समास में पहला शब्द | राज (राजपुत्र में) |
| उत्तरपद | Second Term | समास में दूसरा शब्द | पुत्र (राजपुत्र में) |
हिंदी व्याकरण में समास के मुख्य रूप से 6 भेद होते हैं, जिन्हें निम्नलिखित तरीके से समझा जा सकता है:
इन्हें कारक चिह्नों (का, के, से आदि) से विभक्त नहीं किया जा सकता।
मुख्य उपसर्ग/अव्यय:
अनु, आ, प्रति, यथा, भर, हर, अध, नि, बिन, बे, आदि
उदाहरण तालिका:
| समस्त पद | विग्रह | अंग्रेजी समतुल्य |
|---|---|---|
| यथाशक्ति | शक्ति के अनुसार | According to capacity |
| प्रतिदिन | प्रत्येक दिन | Daily |
| रातोंरात | रात ही रात में | Overnight |
| बेघर | घर के बिना | Homeless |
| अधपका | आधा पका हुआ | Half-cooked |
यह सबसे अधिक प्रचलित समास है, जिसके 7 उपभेद होते हैं।
प्रमुख प्रकार:
दोनों पदों में मूल अर्थ की समानता होती है।
उदाहरण:
mermaid
graph LR
A[नीलकमल] --> B[नीला है जो कमल]
C[महादेव] --> D[महान है जो देव]
E[पीतांबर] --> F[पीला है अंबर (वस्त्र) जिसका]
यह किसी समूह/संग्रह (Collection) का बोध कराता है।
गहन विश्लेषण:
अक्सर व्यक्तियों के नामों/उपाधियों में पाया जाता है।
उद्नाहरण विस्तार: | समस्त पद | शाब्दिक अर्थ | वास्तविक अर्थ | |----------|-------------|---------------| | चतुर्भुज | चार भुजाएँ जिसकी | भगवान विष्णु | | गजानन | गज (हाथी) के समान आनन (मुख) जिसका | भगवान गणेश | | श्वेतांबर | श्वेत (सफेद) अंबर (वस्त्र) जिसका | जैन मुनि |
उदाहरण: - समास: विद्यालय (विद्या + आलय) - विग्रह: विद्या का आलय (House of Knowledge)
सीबीएसई परीक्षा में अक्सर एक ही सामासिक पद के विग्रह के आधार पर दो अलग-अलग समास बन जाते हैं। नीचे दी गई तालिका से यह अंतर स्पष्ट समझें:
| सामासिक पद | विग्रह 1 (कर्मधारय या द्विगु) | विग्रह 2 (बहुव्रीहि समास) | परीक्षा में क्या लिखें? |
|---|---|---|---|
| पीतांबर | पीत (पीला) है जो अंबर (वस्त्र) -> कर्मधारय | पीत हैं अंबर जिसके अर्थात श्रीकृष्ण -> बहुव्रीहि | जैसा विग्रह दिया हो, वैसा ही नाम लिखें। विग्रह न हो तो बहुव्रीहि को प्राथमिकता दें। |
| नीलकंठ | नीला है जो कंठ -> कर्मधारय | नीला है कंठ जिसका अर्थात शिवजी -> बहुव्रीहि | विग्रह के अनुसार भेद तय करें। |
| दशानन | दस आननों (मुखों) का समूह -> द्विगु | दस आनन हैं जिसके अर्थात रावण -> बहुव्रीहि | रावण अर्थ निकलने के कारण बहुव्रीहि श्रेष्ठ है। |
| त्रिनेत्र | तीन नेत्रों का समाहार -> द्विगु | तीन नेत्र हैं जिसके अर्थात भगवान शिव -> बहुव्रीहि | विशेष अर्थ (शिव) होने पर बहुव्रीहि। |
| चतुर्भुज | चार भुजाओं का समूह -> द्विगु | चार भुजाएँ हैं जिसकी अर्थात भगवान विष्णु -> बहुव्रीहि | विष्णु अर्थ में बहुव्रीहि समास होगा। |